Saturday, July 31, 2010

छोटे चोर द्वारा ज्यादा सुने गये रफ़ी के गीत

 आ जा पंछी अकेला है , रफ़ी-आशा,मजरूह,सचिनदेव बर्मन,नौ दो ग्यारह


 दीवाना मस्ताना हुआ दिल, रफ़ी-आशा,मजरूह,बम्बई का बाबू,सचिनदेव बर्मन



मन रे तू काहे न धीर धरे ,चित्रलेखा, रफ़ी,साहिर लुधियानवी,रौशन


Thursday, July 22, 2010

छोटे चोर के ज्यादा देखे-सुने पांच विडियो

बीती न बिताई रैना , लता मंगेशकर -भुपेन्द्र , परिचय , राहुलदेव बर्मन,



इन दिनो,लाईफ़ इन अ मेट्रो



मनमोहना बड़े झूठे , लता मंगेशकर



आजा पंछी अकेला है,रफ़ी -आशा



रैना बीती जाए , लता ,अमर प्रेम,



अभी न जाओ छोड़कर - हम दोनों

Wednesday, July 21, 2010

छोटे चोर की पसन्द (३)

कई बार यूं ही देखा है,शब्द -योगेश ,स्वर - मुकेश



तुम अपना रंज-ओ-गम ,जगजीत कौर,संगीत-खैय्याम


Sunday, July 18, 2010

छोटे चोर के गीत (२)

मन आनन्द आनन्द छायो - आशा भोंसले तथा सत्यशील देशपांडे, संगीत - अजित वर्मन , शब्द- वसन्त देव,फिल्म- विजेता



बावरा मन देखने चला एक सपना ,फिल्म- हजारों ख्वाहिशें ऐसी, शब्द और स्वर - स्वानन्द किरकिरे

Friday, July 16, 2010

छोटे चोर द्वारा सुने गये गीत

संगीत कम्पनी वायकॉम द्वारा यूट्यूब और गूगल के खिलाफ़ कॉपीराईट उल्लंघन के एक अरब डॉलर के दावे में न्यू यॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालत ने यूट्यूब और गूगल के पक्ष में फैसला दे दिया । अदालत ने कहा कि यह संभव नहीं है यूट्यूब जैसी सेवा देने वाली कम्पनी यह पता करे कि चढ़ाए गये विडियो से कॉपीराईट कानून का उल्लंघन हुआ है। विडियो कम्पनी यदि साबित कर दे कि कॉपीराईट उल्लंघन किया गया है तब उसे हटा लिया जाता है !
हमारी स्थिति भी यूट्यूब जैसी है । किशोरावस्था में बॉबी का छोटा वाला रेकॉर्ड (ई.पी.) बहुत जद्दोजहद के बाद खरीदा था और एस.एल.लोनी की प्लेन ट्रिग्नोमेट्री ,भाग एक के पांचवे अभ्यास का २६वां सवाल बिना किसी की मदद के हल कर लेने पर जीजाजी ने उस्ताद हाफ़िज़ अली खाँ का एक बड़ा रेकॉर्ड पुरस्कार स्वरूप दिया था । डिजिटल जमाने में संगीत या विडियो खरीद कर सुना / देखा नहीं है । अधिकांश इनटरनेट से इकट्ठा किया तथा कुछ डीवीडी भेंट स्वरूप मिल गये । दावा करने पर हटा लेने की शर्त मान कर हम भी संगीत प्रेमियों को इस ब्लॉग के मंच से कुछ पेश कर देते हैं ।
छ: - सात सौ गीतों में से कुछ छाँटना कितना कठिन होगा ! इस तरह की समस्या के लिए संगीत के गहन प्रेमी विनय जैन ने श्रोताओं के बीच ऑनलाईन सर्वेक्षण का तरीका अपनाया है । आज उस सर्वेक्षण की अंतिम तारीख थी ।
विनयजी जितना समर्पण और निष्ठा मुझ में नहीं है । हम ने यह गौर किया कि कम्प्यू्टर और आई-पॉड ने एक हिसाब रखा है - ’सर्वाधिक बजाये गये गीत ’। आज से किश्तों में पेश :


Sunday, April 25, 2010

आसमां पे है खुदा और ज़मीं पे हम/फिर सुबह होगी/मुकेश/साहिर खय्याम

आसमां पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आजकल किसीको वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिए रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहे हैं बम

किसको भेजे वो यहां खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
किसको भेजे वो यहां हाथ थामने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम

जो भी है वो ठीक है जिक्र क्यूं करें
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यूं करें
जब उसे ही ग़म नहीं तो क्यूं हमें हो ग़म

गीत - साहिर लुधियानवी
फिल्म - फिर सुबह होगी (१९५८)
स्वर - मुकेश
संगीत- खैय्याम (शर्माजी )

Saturday, April 24, 2010

नया मधुर गीत/दिल क्यूं ये मेरा शोर करे / केके/काईट्स/ नसीर फ़रज़/राजेश रोशन/

K.K - Dil Kyun Yeh Mera - DesiHit.Net .mp3
Found at bee mp3 search engine


दिल क्यूँ ये मेरा शोर करे
इधर नहीं उधर नहीं
तेरी ओर चले


जरा देर में
ये क्या हो गया
नज़र मिलते ही
कहाँ खो गया


भीड़ में लोगों की वो है वहाँ
और प्यार के मेले में अकेला कितना हूं मैं यहाँ

शुरु हो गई कहानी मेरी
मेरे दिल ने बात ना मानी मेरी
हद से भी आगे ये गुजर ही गया
खुद भी परेशां हुआ
और मुझको भी ये कर गया
**************************************
स्वर - केके
फिल्म - काईट्स
गीतकार नसीर फ़राज़
संगीत - राकेश रौशन

Friday, April 16, 2010

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या/ बेग़म अख़्तर/ख़्वाजा हैदर अली ’आतिश’

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
केहती है तुझको खल्क़-ए-खुदा ग़ाएबाना क्या



ज़ीना सबा का ढूँढती है अपनी मुश्त-ए-ख़ाक
बाम-ए-बलन्द यार का है आस्ताना क्या



ज़ेरे ज़मीं से आता है गुल हर सू ज़र-ए-बकफ़
क़ारूँ ने रास्ते में लुटाया खज़ाना क्या



चारों तरफ़ से सूरत-ए-जानाँ हो जलवागर
दिल साफ़ हो तेरा तो है आईना खाना क्या



तिब्ल-ओ-अलम न पास है अपने न मुल्क-ओ-माल
हम से खिलाफ़ हो के करेगा ज़माना क्या



आती है किस तरह मेरी क़ब्ज़-ए-रूह को
देखूँ तो मौत ढूँढ रही है बहाना क्या



तिरछी निगह से ताइर-ए-दिल हो चुका शिकार
जब तीर कज पड़ेगा उड़ेगा निशाना क्या?



बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-अज़ीम
महमाँ साराय-ए-जिस्म का होगा रवना क्या



यूँ मुद्दई हसद से न दे दाद तू न दे
आतिश ग़ज़ल ये तूने कही आशिक़ाना क्या?
-ख़्वाजा हैदर अली ’आतिश ’

Monday, April 5, 2010

तू जी ऐ दिल जमाने के लिए/मन्ना डे/बादल/


खुदगर्ज़ दुनिया में ये,इंसान की पहचान है
जो पराई आग में जल जाये,वो इंसान है

अपने लिए जीए तो क्या जीए - २
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए

बाज़ार से जमाने के,
कुछ भी न हम खरींदेगे-२
हाँ, बेचकर खुशी अपनी औरों के गम खरीदेंगे
बुझते दिए जलाने के लिए-२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..

अपनी ख़ुदी को जो समझा,उसने ख़ुदा को पहचाना
आज़ाद फ़ितरतें इंसां, अंदाज़ क्या भला माना
सर ये नहीं झुकाने के लिए -२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..

हिम्मत बुलन्द है अपनी , पत्थर सी जान रखते हैं
कदमों तले ज़मीं तो क्या,
हम आसमान रख़ते हैं .
गिरते हुओं को उठाने के लिए
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए....

चल आफ़ताब लेकर चल,चल माहताब लेकर चल-२
तू अपनी एक ठोकर में सौ इंकलाब लेकर चल
जुल्म-ओ-सितम मिटाने के लिए
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए....

- जावेद अख़्तर नहीं जावेद अनवर
संगीतकार उषा खन्ना

Friday, March 19, 2010

तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत पर यकीन कर

आज एक OTC प्रशिक्षित स्वयंसेवक के ब्लॉग पर इस गीत का टिकर देख कर मजा आया । आप भी सुनें :

पूरा गीत स्वयंसेवक आत्मसात करें तो कितना भला हो !

Saturday, January 23, 2010

नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव

'वसंतोत्सव’ पर इस पोस्ट के साथ कविता का पाठ लगाना था । वर्डप्रेस में संभव नहीं हुआ । इसलिए यहाँ :

Monday, January 18, 2010

मार्टिन लूथर किंग के जनम दिन पर

अमेरिका में चले नागरिक - अधिकार आन्दोलन के नेता माटिन लूथर किंग महात्मा गांधी से प्रभावित थे । उनका जनम दिन १५ जनवरी को पड़ता है लेकिन अमेरिकी जनता इसे हमेशा निकट के सोमवार को मनाती है । गत शुक्रवार को वे ८१ वर्ष के होते। उनकी हत्या ४ अप्रैल १९६८ को हुई ।
आज उनके अभियान से जुड़े़ तीन गीतों के विडियो तथा ट्विटर पर आ रही उनकी हजारों सूक्तियों में से कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

इस गीत में रंगभेद को एक हौसले और साथ ही व्यंग्य के साथ चुनौती दी गयी है । गायक पीट सीगर हैं ।
अश्वेत प्रार्थना ’ वी शाल ओवरकम ’ न सिर्फ़ नागरिक अधिकार आन्दोलन का मुख्य गीत बना अपितु अन्य देशों , अन्य भाषाओं में भी जन आन्दोलन में बतौर आवाहन गीत ( हम होंगे कामयाब ) लोकप्रिय हुआ :


पीट सीगर की तरह जोन बाएज़ भी नागरिक अधिकार तथा शान्ति आन्दोलन की प्रमुख हस्ती रही हैं और गायिका भी । उनके स्वर में :


ट्विटर पर आ रहे हजारों सन्देशों और सूक्तियों में से कुछ :
वे एक खाँटी नेता थे जो सर्व सम्मति की तलाश नहीं करता था उसका निर्माण करता था ।
’सही काम करने के लिए हर वक्त सही होता है ।
’”किसी मक़सद के लिए न मरने वाला व्यक्ति जीने के लायक नहीं । ’
मेरे तथा मेरे जैसे तमाम अफ़्रीकी-अमेरिकनों के लिए जहां हम पहुंचे हैं उसका मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें प्रणाम ।
’ यह न भूलना कि हिटलर ने जर्मनी में को भी किया एक आईन के तहत किया । ’
’ जीवन का सबसे जरूरी सवाल ,"तुम दूसरों के लिए क्या कर रहे हो ’
’ प्रेम वह एकमेव ताकत है जो दुश्मन को दोस्त में बदल दे ’
’ शान्ति सिर्फ़ एक दूरस्थ लक्ष्य नहीं , उसे हासिल करने का साधन भी है ’
’ चुपचाप जुल्म को कबूल लेने वाला उससे कम दोषी नहीं जो जुल्म का षड़यन्त्र रचता है ’
’ अंधेरा अंधेरे को भगा नहीं सकता,सिर्फ़ प्रकाश भगा सकता है । नफ़रत नफ़रत को खत्म नहीं कर सकती सिर्फ़ प्रेम कर सकता है । ’
’जिन्दगी में महत्व रखने वाले मुद्दों पर जिस दिन हम चुप्पी साधना शुरु करते हैं ,उस दिन जिन्दगी के अन्त की शुरुआत हो जाती है ’
तीन सम्बन्धित पोस्ट :
तीन बागी गायक

अशोक पाण्डे को समर्पित जोन बाएज़ पर पोस्ट
गाना माने प्यार करना , हाँ कहना ,उड़ना और ऊँचे उड़ना

Sunday, January 3, 2010

उम्र कब की बरस के सुफ़ेद हो गई,काली बदरी जवानी की छँटती नहीं !

गुलजार के शब्द ,विशाल भारद्वाज का संगीत , राहत फ़तह अली की आवाज और फिल्म इश्किया का यह गीत

Sunday, December 27, 2009

भारतीय रॉक सितारा अशीम चक्रवर्ती नहीं रहे

पता नहीं मैं रॉक संगीत समझता था या नहीं । कितना सुना था इसका भी अन्दाज न था । भारत में इण्डियन ओशन जैसे बैण्ड तथा पाकिस्तान के कुछ बैण्ड्स के आने के बाद मेरे जैसों के लिए इस विधा के दरवाजे खुले । बहुत कुछ कर्णप्रिय लगा , समझ में भी आया और स्पन्दित कर गया । इस विप्लवी-से संगीत से मेरी घनिष्टता और परिचय अगली पीढ़ी के कारण हुआ ।
भारतीय रॉक प्रेमियों के लिए २५ दिसम्बर , २००९ का दिन दु:खद रहा । ’इण्डियन ओशन’ नामक बैण्ड के प्रमुख और पुराने सदस्य अशीम चक्रवर्ती की ५२ साल की अवस्था में हृदय आघात से मृत्यु हो गयी । अशीम इस फ़्यूजन रॉक बैण्ड के संस्थापक सदस्यों में थे । उनकी नीचे के सप्तक और ऊपर के सप्तक के बीच का विस्तार असीम था । उन्होंने विज्ञापन का काम छोड़कर यह बैण्ड बनाया ।

मैं जिन गीतों से प्रभावित हुआ हूँ , उन्हें यहाँ पेश कर रहा हूँ । दोनों गीतों के बोलों को सुन कर काफ़ी सूफ़ी / निर्गुण सा लगता है । अपनी राय दीजिएगा । अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में उनका गीत लिया था (बन्दे-यह गीत पेश है) । दूसरा गीत गुलाल से है,अशीम के साथ राहुल राम का स्वर है ।

Saturday, December 19, 2009

पूर्व बांग्ला की लोक धुन भटियाली , सितार, फिल्म संगीत पर

भटियाली वे बांग्ला नौकागीत हैं जो भाटा के दौरान नाविक गाया करते हैं , नदी की बहने की स्वाभाविक दिशा में । भटियाली - धुन इतनी मधुर और लोकप्रिय है की गीतों के अलावा प्रख्यात वादकों ने इन्हें सितार ,सरोद और बाँसुरी पर बजाया है । भटियाली में रवीन्द्र संगीत भी है । अन्य भारतीय भाषाओं में भी भटियाली धुनें अपनाई गई हैं । यहाँ भटियाली की दो धुनों पर दो हिन्दी फिल्मी गीत,सितार पर उस्ताद विलायत खान की बजाई एक धुन तथा रुना लैला का गाया एक बांग्ला लोक गीत है । गौर कीजिएगा धुनें दो हैं,दोनों भटियाली ।
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली

नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला



गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का 'ऐ मेरे प्यारे वतन' लिखा है)

Friday, November 27, 2009

मालूम क्या किसीको, दर्दे – निहाँ हमारा / अल्लामा इक़बाल

सारे जहाँसे अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ।

हम बुलबुलें हैं उसकी , वह बोस्ताँ हमारा ॥ध्रु.॥

गुरबतमे हों अगर हम , रहता है दिल वतनमें ।

समझो वहीं हमें भी , दिल हो जहाँ हमारा ॥१॥

परबत वह सबसे ऊँचा , हमसाया आसमाँका ।

वह संतरी हमारा , वह पासबाँ हमारा ॥२॥

गोदीमें खेलती हैं , जिसकी हजारों नदियाँ ।

गुलशन है जिनके दम से , रश्के-जिनाँ हमारा ॥३॥

ए आबे-रूदे-गंगा , वह दिन है याद तुझको ।

उतरा तेरे किनारे , जब कारवाँ हमारा ॥४॥

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ।

हिन्दी हैं हम , वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ॥५॥

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा , सब मिट गये जहाँ से ।

अब तक मग़र है बाकी , नामोनिशाँ हमारा ॥६॥

कुछ बात है कि हस्ती , मिटती नहीं हमारी ।

सदियों रहा है दुश्मन , दौरे – जमाँ हमारा ।।७॥

इक़बाल कोई महरम , अपना नहीं जहाँमें ।

मालूम क्या किसीको , दर्दे – निहाँ हमारा ॥८॥

- अल्लामा इक़बाल



बोस्ताँ = बाग , गुरबत = विदेश , परदेश

हमसाया = पड़ौसी , पासबाँ = रक्षा करने वाला ,

रश्के-जिनाँ = स्वर्ग को भी डाह हो जिनसे ,

महरम = भेद जानने वाला , दर्दे-निहाँ = छिपी हुई वेदना



सुषमा श्रेष्ठ द्वारा गाया ।

Saturday, November 21, 2009

जीवन से लम्बे हैं बन्धु , ये जीवन के रस्ते /मन्ना डे/गुलजार/आशीर्वाद/वसन्त देसाई

जोगी ठाकुर का लिखा गीत तरुणाई से लबरेज गाड़ीवान गा रहा है । जोगी ठाकुर ही इतना डूब के सुन रहे हैं ,उसे पता नहीं है ।
स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद




Wednesday, November 4, 2009

दिल नाउम्मीद तो नहीं , नाकाम ही तो है

आज रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर गीत चढ़ाने वाले शौकीनों के लिए ’खुले स्रोत ’ का उपाय सोदाहरण बताया है । दो बार असफल होने के बावजूद उदास नहीं हुआ , फलस्वरूप यह उम्मीद पैदा करने वाला गीत आप सबके लिए प्रस्तुत हो सका । दिल नाकामयाब भले ही हो, नाउम्मीद न हो - आप सब के लिए यह कामना है । रवि भाई को समर्पित

Tuesday, October 20, 2009

बदाऊँ के शालीन के मिलने की खुशी में राशिद खान

डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है ।
इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बदाऊँ के हैं ।’ इस नयी दोस्ती के नाम पर आज की पोस्ट उस्ताद राशिद ख़ान द्वारा राग भटियार में गाया तराना है। कहते हैं , भटियार शब्द का मूल भतृहरि से है। इसके गायन का वक्त पौ फटते ही है ।
उस्ताद राशिद ख़ान के गायन का रस लीजिए :

Friday, October 16, 2009

शुभ दीपावली : तुम अपना रंज-ओ-ग़म , अपनी परेशानी मुझे दे दो

तुम अपना रंज-ओ-ग़म ,अपनी परेशानी मुझे दे दो ।
तुम्हें ग़म की कसम , इस दिल की वीरानी मुझे दे दो ।
ये माना मैं किसी का़बिल नहीं हूँ इन निग़ाहों में ।
बुरा क्या है अग़र , ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो ।
मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है ।
कोई इनके लिए अपनी निगेबानी मुझे दे दो ।
वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था ।
बड़ी इनायत है अग़र उसकी पशेमानी मुझे दे दो ।
- फिल्म - शग़ुन (१९६४) , गीतकार - साहिर लुधियानवी ,गायिका - जगजीत कौर, संगीत- खैय्याम