दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर का परिचय इस ब्लॉग के श्रोताओं को है । उनके गायन की तीन पोस्ट यहाँ पेश हो चुकी हैं । श्री संजय पटेल के अनुरोध ( तिलक कामोद ) पर यहाँ राग विभास , मालकौंस अदि यहाँ प्रस्तुत किए जा रहे हैं । सुधी श्रोता वृन्द रसास्वादन करेंगे ।
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Wednesday, August 20, 2008
Tuesday, August 19, 2008
भजन / पलुस्कर / ई-स्वामी के नाम
डी. वी. पलुस्कर के गायन की प्रस्तुति पूर्व में भी की थी । इस बार ज्यादा प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत हैं । बरसों बाद लताजी ने भी इन भजनों को उन्हीं धुनों में गाया ।
इस बार यह भजन विडियो के रूप में मिले थे , जिन्हें मैंने डाउनलोड किया रियल प्लेयर की मदद से । इससे मैं उन्हें बिना व्यवधान ( बफ़रिंग की वजह से ) सुन सकता हूँ । यूट्यूब वाले कई बार विडियो हटा देते हैं , तब भी आप द्वारा प्रकाशित विडियो अन्तर्ध्यान हो जाता है । इसके बाद मैं परेशान रहा कि इन्हें अपने चिट्ठे पर चढ़ाने की क्या तकनीक हो , उपाय हो ? 'ब्लॉगर' वाले लम्बे - लम्बे ब्लॉगर आई.डी दे कर 'समर्थन' से सम्पर्क का उपदेश दे रहे थे । इसी बीच हिन्दी चिट्ठेकारी की प्रणेताओं में एक श्री ई-स्वामी ने मुझे इसका समाधान बताया । प्रयोग उन्हींके नाम समर्पित है ।
प्रस्तुति पर राय विशेष रूप से आमंत्रित है ।
इस बार यह भजन विडियो के रूप में मिले थे , जिन्हें मैंने डाउनलोड किया रियल प्लेयर की मदद से । इससे मैं उन्हें बिना व्यवधान ( बफ़रिंग की वजह से ) सुन सकता हूँ । यूट्यूब वाले कई बार विडियो हटा देते हैं , तब भी आप द्वारा प्रकाशित विडियो अन्तर्ध्यान हो जाता है । इसके बाद मैं परेशान रहा कि इन्हें अपने चिट्ठे पर चढ़ाने की क्या तकनीक हो , उपाय हो ? 'ब्लॉगर' वाले लम्बे - लम्बे ब्लॉगर आई.डी दे कर 'समर्थन' से सम्पर्क का उपदेश दे रहे थे । इसी बीच हिन्दी चिट्ठेकारी की प्रणेताओं में एक श्री ई-स्वामी ने मुझे इसका समाधान बताया । प्रयोग उन्हींके नाम समर्पित है ।
प्रस्तुति पर राय विशेष रूप से आमंत्रित है ।
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Saturday, August 9, 2008
सुने री मैंने निर्बल के बल राम/पलुस्कर/भैरवी
सूरदास की भक्ति रचना , 'सुने री मैंने निर्बल के बल राम ', स्वर पंडित डी . वी. पलुस्कर का , राग - भैरवी ।
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Friday, July 4, 2008
पलुस्कर का मधुर गायन
पंडित दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर सिर्फ़ दस साल के थे जब उनके पिता विष्णु दिगम्बर पलुस्कर नहीं रहे। पं. विनायकराव पटवर्धन तथा पं नारायणराव व्यास से उन्होंने गायन सीखा। १४ वर्ष की अवस्था में हरवल्लभ संगीत सम्मेलन (पंजाब) में प्रथम प्रस्तुति का मौका मिला। उन्होंने ग्वालियर घराने को अपनाया लेकिन अन्य घरानों की विशिष्टताओं को भी ग्रहण किया। उनकी आवाज अत्यन्त मधुर और कर्णप्रिय थी।
उनके भजन तथा उस्ताद अमीर खान साहब के साथ बैजू बावरा फिल्म में जुगलबन्दी भी अत्यन्त प्रसिद्ध हैं।
३४ वर्ष की अल्पायु में मस्तिष्क ज्वर से उनकी मृत्यु हुई।
'आगाज़' के सुधी श्रोता इस अमर गायक के गायन का रसास्वादन करेंगे ।
उनके भजन तथा उस्ताद अमीर खान साहब के साथ बैजू बावरा फिल्म में जुगलबन्दी भी अत्यन्त प्रसिद्ध हैं।
३४ वर्ष की अल्पायु में मस्तिष्क ज्वर से उनकी मृत्यु हुई।
'आगाज़' के सुधी श्रोता इस अमर गायक के गायन का रसास्वादन करेंगे ।
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