५० के दशक में पश्चिम में अंग्रेजी के लोकप्रिय गीतों के बारे में एक परम्परा थी । ग्रामाफोन कम्पनियाँ 'हिट गीत' को अन्य लोकप्रिय कलाकारों से भी गवाते थे और उसके ग्रामाफोन रेकॉर्ड भी जारी करते थे । इसके देखा-देखी एच.एम.वी ने भारत में भी यह प्रयोग आजमाया । प्रयोग व्यापक न हो सका ।
बहरहाल चित्रगुप्त के संगीत निर्देशन में बनी 'भाभी' फिल्म का 'चल उड़ जा रे पंछी , अब ये देश हुआ बेगाना ' अपने जमाने का हिट गीत था । यह गीत फिल्म में मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया है । एच.एम.वी ने ७८ आर.पी.एम (बहुत तेज चलने वाले मोटे रेकॉर्ड ) के रेकॉर्ड में इस गीत को तलत महमूद की आवाज़ में भी पेश किया ['Version Recording FT21027 Twin/Black Label 78 RPM'] ।
संगीत के रसिक डॉ. बुखारी ने इस दुर्लभ गीत को यू ट्यूब में पेश किया है ,तलत साहब के कुछ दुर्लभ चित्रों के साथ । यहाँ यह बता देना उल्लेखनीय है कि मुकेश की तरह तलत महमूद ने कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया था ।
पहले सुनें तलत महमूद के स्वर में
फिर मोहम्मद रफ़ी के स्वर में :
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Friday, September 12, 2008
Tuesday, July 15, 2008
जलते हैं जिसके लिए तेरी आंखों के दीए
मेरे जनम के साल में बनी फिल्म सुजाता का यह गीत मेरे पिताजी(अभी उमर ८४) को भी पसन्द है। तरुण शान्ति सेना के शिबिरों में अच्छे गले वाले शिबिरार्थियों से वे इस गीत को सुनने की फ़रमाइश जरूर करते । मैं दरजा सात - आठ में पहुँचा तो गीत की रूमानियत को जज़्ब करने लगा । आज कल विविध भारती वाले इसे कम सुना रहे हैं । बोल इस प्रकार हैं :
जलते हैं जिसके लिए , तेरी आंखों के दीए,
ढूंढ़ लाया हूं वही गीत मैं तेरे लिए ।
दिल में रख लेना इसे हाथों से ये छूटे न कहीं ,
गीत नाज़ुक हैं मेरे शीशे से भी टूटे न कहीं ,
गुनगुनाऊँगा वही गीत मैं तेरे लिए ॥
जब तलक न ये तेरे रस के भरे होटों से मिलें,
यूँ ही आवारा फिरें , गायें तेरी ज़ुल्फ़ों के तले ,
गाए जाऊँगा वही गीत मैं तेरे लिए ॥
जलते हैं जिसके लिए , तेरी आंखों के दीए,
ढूंढ़ लाया हूं वही गीत मैं तेरे लिए ।
दिल में रख लेना इसे हाथों से ये छूटे न कहीं ,
गीत नाज़ुक हैं मेरे शीशे से भी टूटे न कहीं ,
गुनगुनाऊँगा वही गीत मैं तेरे लिए ॥
जब तलक न ये तेरे रस के भरे होटों से मिलें,
यूँ ही आवारा फिरें , गायें तेरी ज़ुल्फ़ों के तले ,
गाए जाऊँगा वही गीत मैं तेरे लिए ॥
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