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Thursday, July 2, 2009

तीन सदाबहार कव्वालियां

तीन सदाबहार फिल्मी कव्वालियाँ प्रस्तुत हैं । लोग- बाग पसन्द करेंगे तो और पेश करने का साहस करूँगा । इन कव्वालियों का रुहानी अर्थ पहले नहीं दिखता था । यह मत सोचिएगा कि बुढ़ौती का परिणाम है- दिखने लगना । लोकनायक जयप्रकाश बताते थे कि किशोर और तरुणों के लिए भी आध्यात्मिकता की तमाम मिसालें दे कर ।

ये है इश्क - इश्क

न तो कारवाँ की तलाश है

कहीं दाग न लग जाए