तीन सदाबहार फिल्मी कव्वालियाँ प्रस्तुत हैं । लोग- बाग पसन्द करेंगे तो और पेश करने का साहस करूँगा । इन कव्वालियों का रुहानी अर्थ पहले नहीं दिखता था । यह मत सोचिएगा कि बुढ़ौती का परिणाम है- दिखने लगना । लोकनायक जयप्रकाश बताते थे कि किशोर और तरुणों के लिए भी आध्यात्मिकता की तमाम मिसालें दे कर ।
ये है इश्क - इश्क
न तो कारवाँ की तलाश है
कहीं दाग न लग जाए