डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है ।
इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बदाऊँ के हैं ।’ इस नयी दोस्ती के नाम पर आज की पोस्ट उस्ताद राशिद ख़ान द्वारा राग भटियार में गाया तराना है। कहते हैं , भटियार शब्द का मूल भतृहरि से है। इसके गायन का वक्त पौ फटते ही है ।
उस्ताद राशिद ख़ान के गायन का रस लीजिए :
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Tuesday, October 20, 2009
Monday, April 6, 2009
राग देश में तराना : उस्ताद राशिद खान
परसों तक विदुषी वीणा सहस्रबुद्धे विविध भारती के ’संगीत सरिता’ में ’तरानों’ से परिचय करा रही थीं । ज्यादातर हमारी काशी के पद्मश्री पंडित बलवन्तराय भट्ट जी द्वारा तैय्यार तराने सुनाये,उन्होंने ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।
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