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Monday, March 9, 2009

Saturday, August 30, 2008

'चाँदनी की पालकी में बैठकर' - पहेली

' चाँदनी की पालकी में बैठकर , कोई आने वाला है ' इस गीत को आप पूरा सुनें तथा देखें भी । आप को गायक - गायिका का नाम बताना है । गीत की विशेषता पर टिप्पणियाँ भी सादर आमंत्रित हैं । धुन सचिन देव बर्मन की है तथा गीत साहिर लुधियानवी का है ।
जवाब से इतर टिप्पणियों के लिए समय सीमा नहीं है । जवाब परसों यानी १ सितम्बर की सुबह तक लिए जाएंगे ।

Wednesday, August 27, 2008

मुकेश के स्वर में

कल श्रोता बिरादरी ने सूचना दी कि आज मुकेश की पुण्य तिथि है । संगीत वाले चिट्ठों ने मुकेश के गीत प्रस्तुत किए हैं । मैं भी अपनी पसन्द के कुछ गीत और विडियो प्रस्तुत कर रहा हूँ , उम्मीद है आप को भी पसन्द हों ।

Monday, August 25, 2008

विडियो पहेली परिणाम के बहाने 'बिन्दी'- चर्चा

२३ अगस्त को मैंने एक विडियो पहेली इसी ब्लॉग पर पूछी थी । पाँच मित्रों ने भाग लिया , जिनके उत्तर उसी पोस्ट की टिप्पणी के रूप में आज प्रकाशित कर दिए गए हैं । पाँचों मित्रों का मैं आभारी हूँ ।
यह गीत पहली बार सुना तब मुझे किसी भी भारतीय गीत से जुदा नहीं लगा । गीत मुझे काफ़ी मधुर लगा था और नायक-नायिका भी खुशनुमा लगे । मुझे तलत महमूद साहब की थोड़ी थोड़ी याद आई । फिर भाई साहब से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि तलत साहब ने अभिनय भी किया है । इस कड़ी पर जाइएगा तो आपको तलत साहब की खुशनुमा तसवीरें मिलेंगी।
'हिन्दी फिल्मों को घोल कर पीए हुए' दिलीप कवठेकर साहब ने सब से विस्तृत उत्तर दिया । यह भारतीय नहीं है इस बात पर वे इन कारणों से आए :
"य़ह किसी भी हिंदुस्तानी फ़िल्म का गाना नही हो सकता. परिवेश, चेहरों के सांचे, माथे पर बिंदिया लिये एक भी महिला नही, कोई भी पहचान की सूरत नही, एक्स्ट्रा में भी नही."

उनके बताये कारण में दो बातें खटकी । 'चेहरों के सांचे' और 'माथे पर बिन्दिया लिये एक भी महिला' का न होना ! भारत , पाकिस्तान और बांग्लादेश के चेहरों के साँचों में अन्तर ! दिलीप भाई कभी स्पष्ट करेंगे । बिन्दिया वाली बात पर मेरी पत्नी डॉ.स्वाति ने कहा कि हिन्दू महिलाएं बिन्दी न लगाना अशुभ मानती हैं और इसीलिए मुस्लिम महिलाएं लगाना । इससे लगा कि क्या यह कोई धार्मिक फर्क है ? खोज शुरु की तो पता चला कि खोजा मुस्लिम महिलाएं ,बांग्लादेशी मुस्लिम महिलाएं तथा कर्नाटक की मुस्लिम महिलाएं तो व्यापक तौर पर बिन्दी लगाती हैं । फिर पाकिस्तानी पंजाबी गीत मिले बिन्दिया वाले और बांग्लादेशी भी । पाकिस्तान में एक अभिनेत्री का नाम भी बिन्दिया है । फिल्मी दाएरे से ऊपर उठने पर रूहानी और आध्यात्मिक पुट लिए - 'छाप तिलक सब छीनी रे,मों से नैना मिलाइके' तो भारत-पाक दोनों देशों में गाया जाता है ।
अब इससे उलट बात की पुष्टि करने की सोची - क्या भारतीय फिल्मों की नायिकाएं अनिवार्य तौर पर बिन्दी लगाती हैं? दो पसन्दीदा नए गीतों को सुना/देखा । दोनों की हिरोइनें बिना बिन्दी लगाए थीं । बिन्दी का मामला सांस्कृतिक प्रतीत हुआ , धार्मिक से ज्यादा ।
दो बांग्लादेशी गीत (सबीना यास्मीन और सलमा अख़्तर के विडियो );

पाकिस्तानी पंजाबी गीत :

और भारतीय फिल्म 'कभी अल्विदा न कहना' तथा 'लाइफ़ इन ए मेट्रो ' के गीत :


Saturday, August 23, 2008

एक विडियो पहेली

फिल्मी गीतों पर एक पहेली मैंने पहले पेश की थी । लोगों ने काफ़ी रुचि दिखाई थी । उस चिट्ठे (शैशव) पर अब तक की सर्वाधिक देखी गयी पोस्ट थी वह । विडियो चढ़ाना सीखने के बाद यह एक प्रश्न वाली पहेली प्रस्तुत है । एक मधुर गीत प्रस्तुत है । गीत के बारे में टिप्पणी तो आमंत्रित है ही सवाल भी पूछ रहा हूँ -
गीत कैसा लगा ? यह गीत किसने गाया है ? किस फिल्म का है ?दूसरे और तीसरे प्रश्न के उत्तर वाली टिप्पणियाँ २५ अगस्त को प्रकाशित होंगी ।


Friday, August 22, 2008

'शाम' पर चार मधुर फिल्मी गीत

डी. वी. पलुस्कर को सुनने वाले जो हिन्दी चिट्ठों पर पहुंचते हैं , अभी कम हैं । ऐसे में फिल्मी गीत सुनें :



हुई शाम उनका खयाल आ गया - मेरे हमदम मेरे दोस्त 

 रोज शाम आती थी - इम्तेहान


 दिन ढल जाए - गाइड

 वो शाम कुछ अजीब थी - ख़ामोशी