Saturday, August 29, 2020

दीवाली पर सप्रेम उपहार , दुर्लभ गीतों का

दिनेशरायजी की तरह दीवाली के अवसर पर मेरी बिटिया प्योली भी घर आई है । उसने दो तीन गीतों की फरमाईश कर दी जो मेरे जमाने के हैं और उसने बचपन में सुने हैं । बहुत मुश्किल हो गयी खोजने में । लेकिन मेहनत का फल मिला किसी न किसी रूप में । उम्मीद है आप सब इनका पूरा रस लेंगे । जिन्दगी को संवारना होगा आई ऋतु सावन कीचाँद अकेला जाए सखी रीनई री लगन और मीठी बतियां




Wednesday, June 10, 2020

अच्छा गाना सुनो





बांसुरी बजा रहा बच्चा फिल्म में मूक था।गाना पहली बार जब सुना था तब मैं उसकी उम्र का था।मेरे स्कूल में 'दूर गगन की छांव में' जब दिखाई गई थी।

 विविध भारती पर यह गाना बज रहा था,अभी उस दिन।मृत्यु से कुछ दिन पहले।हमेशा टिक टॉक पर सुनने वाली शशिकला को टोक कर स्वाति ने कहा,'ये अच्छा गाना सुनो।'

कहीं बैर न हो,कोई गैर न हो,सब मिल के यूं चलते चलें।