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Saturday, August 29, 2020

दीवाली पर सप्रेम उपहार , दुर्लभ गीतों का


दिनेशरायजी की तरह दीवाली के अवसर पर मेरी बिटिया प्योली भी घर आई है । उसने दो तीन गीतों की फरमाईश कर दी जो मेरे जमाने के हैं और उसने बचपन में सुने हैं । बहुत मुश्किल हो गयी खोजने में । लेकिन मेहनत का फल मिला किसी न किसी रूप में । उम्मीद है आप सब इनका पूरा रस लेंगे । जिन्दगी को संवारना होगा
आई ऋतु सावन कीचाँद अकेला जाए सखी रीनई री लगन और मीठी बतियां




Monday, July 7, 2008

चाँद अकेला जाये सखी री, येसुदास ,आलाप

चाँद अकेला जाये सखी री,
काहे अकेला जाई सखी री ।
मन मोरा घबडाये री,सखी री,सखी री,ओसखी री ।
वो बैरागी वो मनभावन,
कब आयेगा मोरे आँगन,
इतना तो बतलाये री,
सखी री , सखी री ,ओ सखी री । चाँद अकेला..
अंग अंग में होली दहके,
मन में बेला चमेली महके ,
ये ऋत क्या कहलाये री,
भाभी री , भाभी री, ओ भाभी री । चाँद अकेला...

Tuesday, April 29, 2008

कहाँ से आए बदरा : इंदु जैन:येशू दास हेमंती शुक्ला

एक पंक्ति ने सूचित किया कि गीतकार इंदु जैन नहीं रहीं । फिल्म चश्मेबद्दूर में उनका रचित यह गीत येशूदास और हेमंती शुक्ला ने गाया है ।

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कहाँ से आए बदरा
घुलता जाए कजरा

पलकों के सतरंगे दीपक
बन बैठे आँसू की झालर
मोती का अनमोलक हीरा
मिट्टी में जा फिसला ॥
नींद पिया के संग सिधारी
सपनों की सुखी फुलवारी
अमृत होठों तक आते ही
जैसे विष में बदला ॥

उतरे मेघ या फिर छाये
निर्दय झोंके अगन बढ़ाये
बरसे हैं अब तोसे सावन
रोए मन है पगला ॥