अनकही (१९८५) फिल्म में लिया गया भीमसेन जोशी का गाया तुलसी का भजन "रघुवर तुमको मेरी लाज” इस चिट्ठे पर प्रकाशित किया था । वह भजन भी फिल्म में प्रसिद्ध बाँग्ला अभिनेता अनिल चटर्जी ( २५ अक्टूबर १९२९ - १७ मार्च १९९६ )गा रहे हैं । मेरे प्रिय मित्र - श्रोता विष्णु बैरागी ने तब कहा था , ’ पापाजी (जयदेवजी)ही ऐसे अनूठे और साहसी प्रयोग कर सकते थे। वे गीतों की धुनें नहीं रचते थे, आत्मा को शरीर प्रदान करते थे।’ फिल्म में इस पूरे गीत का फिल्मांकन - विष्णु भाई के कथन को पूरी तरह चरितार्थ करता हुआ ! दीप्ति नवल का प्रसव, श्रीराम लागू की पायचारी , दीना पाठक की चिन्ता , अनिल चटर्जी की निश्चन्तता , अमोल पालेकर की गति !
मानोषी ने तब बताया था कि "फिल्म का हर गाना उम्दा है " । ढ़ूँढ़ लिए थे गीत लेकिन सुनाने का जुगाड़ अब हो पाया।
कोई गीतकार का नाम बता दे !
[ प्लेयर पर कर्सर को निचले भाग में ले जायेंगे तो नियन्त्रण के औजार दिखाई देंगे। फिर से सुनने के लिए गीत समाप्त होने पर कर्सर निचले भाग में ले जाना होता है और खटका मारना होता है । फिर से सुनने , एम्बेड कोड और डाउनलोड के प्रावधान परदे पर प्रकट हो जाते हैं । डिवशेयर की खूबी है कि दूसरी बार (बफ़रिंग के पश्चात) सुनने पर बिलकुल रुकावट नहीं होती । ]
मानोषी ने तब बताया था कि "फिल्म का हर गाना उम्दा है " । ढ़ूँढ़ लिए थे गीत लेकिन सुनाने का जुगाड़ अब हो पाया।
कोई गीतकार का नाम बता दे !
[ प्लेयर पर कर्सर को निचले भाग में ले जायेंगे तो नियन्त्रण के औजार दिखाई देंगे। फिर से सुनने के लिए गीत समाप्त होने पर कर्सर निचले भाग में ले जाना होता है और खटका मारना होता है । फिर से सुनने , एम्बेड कोड और डाउनलोड के प्रावधान परदे पर प्रकट हो जाते हैं । डिवशेयर की खूबी है कि दूसरी बार (बफ़रिंग के पश्चात) सुनने पर बिलकुल रुकावट नहीं होती । ]