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छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
Tuesday, March 24, 2009
ओ रसिया मोरे पिया , छीन ले गयो रे जिया
Thursday, October 23, 2008
दो अनूठे गीत
दूसरा गीत १९५२ की जाल फिल्म का है , साहिर लुधियानवी के बोलों को सचिन देव बर्मन ने सुरों में ढाला है , गायिका लता मंगेशकर हैं ।
सुनिए और बताइए कि पहले इन्हें सुना था या नहीं और कैसे लगे ?
Monday, September 1, 2008
शमशेरराज कपूर और चाँद उस्मानी की जीवन ज्योति
शम्मी कपूर का मूल नाम शमशेरराज कपूर था । १९४८ में अपने पिता की थियेटर कम्पनी में ५० रुपये दरमाह पर एक जूनियर एक्टर के रूप में आपने काम शुरु किया । १९५३ में बनी 'जीवन ज्योति' उनकी बतौर हीरो पहली फिल्म थी और उसमें उनकी नायिका चाँद उस्मानी थीं । शम्मी कपूर भारत में इन्टरनेट प्रयोक्ताओं में अग्रणी रहे हैं तथा Internet Users Community of India के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं ।
'पहेली' में जो गीत दिखाया गया है उसे अन्त तक कम ही लोगों ने सुना । इसलिए पुरुष स्वर के बारे में बताने की जरूरत नहीं समझी । पुरुष स्वर के बारे में तीन पाठकों ने ही जवाब दिए - ममता , नचिकेता और विनय जैन । ममताजी ने आशा भोंसले का स्त्री स्वर अन्य कई प्रतिभागियों की भांति सही पहचाना लेकिन पुरुष स्वर पहचानने में चूक गयीं । पुरुष स्वर जो गीत के अन्तिम हिस्से में है वह अभिनेता का खुद का स्वर है - शम्मी कपूर का । इस प्रकार गायक और गायिका दोनों के स्वर पहचानने वाले विनय जैन ( v9y ) और नचिकेता हैं ।
सिर्फ़ स्त्री -स्वर को सही पहचानने वाले पारुल , ममता , मनीष तथा स्मार्ट इण्डियन ।
दिनेशराय द्विवेदीजी और ममताजी ने गीत की मिठास को पसन्द किया ।
इस गीत में आशाजी का स्वर लता मंगेशकर के शुरुआती गीतों से कितना निकट है ! ओ.पी. नैय्यर साहब के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले की अपनी स्वतंत्र पहचान और छाप वाले गीत बाद में आए । शम्मी कपूर को पहचानने में ममता चूकीं , उन्हें वे राज कपूर लगे । इसीलिए मुकेश और रफ़ी के बीच मुकेश चुनना उन्हें लाजमीतौर पर 'सही' लगा ।
ममताजी , सभी टिप्पणियां आज अनुमोदित हो गयी हैं । दिनेशजी ने सिर्फ़ गीत की मिठास पर राय व्यक्त की थी इसलिए पहले छपी ।
Sunday, July 20, 2008
कैसे उनको पाऊँ ,आली/ महादेवी वर्मा /आशा भोंसले/जयदेव
यहाँ प्रस्तुत है उस संग्रह से महादेवी वर्मा का गीत - कैसे उनकों पाऊँ , आली
Friday, July 18, 2008
Monday, May 19, 2008
एक मधुर दोगाना
आप को प्यार छुपाने की बुरी आदत है , आप को प्यार जताने की बुरी आदत है ।
आप ने सीखा है क्या दिल को लगाने के सिवा ?
आप को आता है क्या, नाज़ दिखाने के सिवा ?
और हमें नाज़ उठाने की बुरी आदत है ॥
किसलिए आप ने शर्मा के झुका ली आँखें,
किसलिए आप से घबरा के बचा ली आँखें ?
आप को तीर चलाने की बुरी आदत है ॥
Wednesday, April 16, 2008
लाली है सवेरेवाली

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फिल्म अभी तो जी लें
संगीत सपन जगमोहन
गायक किशोर कुमार , आशा भोसले
गीत तू लाली है सवेरेवाली , गगन रंग दे ,तू मेरे मन का
जो सूरज तू मैं धरती तेरी
तू साथी है मेरे जीवन का
तेरे - मेरे बीच की मिटेगी कब दूरी
होती है कुछ तो सनम सभी की मजबूरी
तुम हो निगाहों में कब आओगी बाहों में
तुम में जो हिम्मत हो , मुझसे मुहब्बत हो
सबसे मुझे छीन लो ॥
तेरे ही फेरे करूँ,खिंची हुई मैं आऊँ
देखूँ तुझे दूर से गले ना लग पाऊँ
किसने तुम्हें रोका , कर लो वो जो सोचा
हँसी न उड़ाओ और न जलाओ
आँचल की तुम छाँव दो ॥