Showing posts with label subbalaxmi. Show all posts
Showing posts with label subbalaxmi. Show all posts

Tuesday, April 21, 2009

' विरह विथा का को कहूं सजनी '

कल मेरी पत्नी डॉ. स्वाति उत्तर बंग में समाजवादी जनपरिषद के दो प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने गयी हैं । आज उनकी प्रिय एम. एस. सुब्बलक्ष्मी के स्वर में मीराबाई का यह  भजन पेश कर रहा हूँ । वे लौटकर सुनेंगी । मैं आज सुन रहा हूँ। क्या पता गुनगुना रही हों , चुनावी सभाओं के बीच के अन्तराल में !

Friday, April 25, 2008

हरि आवन की आवाज : मीरा बाई :सुब्बलक्ष्मी


यह चित्र विभाजन के बाद जल रही फिरकावाराना आग़ के दौरान दिल्ली में हो रहे प्रार्थना - प्रवचन का है । भजन गाने वाली महिलाओं में सब से बाँए, मीरा भजन गा रही हैं एम . एस . सुब्बलक्ष्मी । गाँधी जी के आग्रह पर सुब्बलक्ष्मी ने मीरा के भजन गाए । भक्ति आन्दोलन के दौरान राजपुताना से चल कर मीरा बाई काशी आईं और सन्त रविदास की शिष्य बनीं । इस युग में सुब्बलक्ष्मी ने मीरा के भजनों को कर्नाटक संगीत की सुन्दर धुनें दीं और अपना मधुर स्वर । पूरब-पश्चिम , उत्तर-दक्षिण का अनूठा मेल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है । प्रस्तुत भजन में 'कोयलिया'-शब्द को अनेक बार दोहराते हुए सुब्बलक्ष्मी को गौर से सुनिएगा ।