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Friday, January 2, 2009

'तुम हो गरीब नेवाज'-तुलसीदास : भीमसेन जोशी

'रघुवर तुम तो मेरी लाज ,सदा-सदा मैं सरन तिहारी,तुम हो गरीब नेवाज'। संगीतकार जयदेव ने पंडित भीमसेन जोशी का गाया तुलसीदास का यह भजन १९८५ में बनी फिल्म 'अनकही' में लिया है । 'माँग के खईबो , मसीद में सोईबो' वाले तुलसीदास यहाँ भी छद्म धर्म निरपेक्षता के चक्कर में पड़ गए ? 'रघुवर' को 'गरीब नेवाज' की जगह 'दीनबन्धु' टाइप कुछ न कह सके ?

Tuesday, August 19, 2008

भजन / पलुस्कर / ई-स्वामी के नाम

डी. वी. पलुस्कर के गायन की प्रस्तुति पूर्व में भी की थी । इस बार ज्यादा प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत हैं । बरसों बाद लताजी ने भी इन भजनों को उन्हीं धुनों में गाया ।
इस बार यह भजन विडियो के रूप में मिले थे , जिन्हें मैंने डाउनलोड किया रियल प्लेयर की मदद से । इससे मैं उन्हें बिना व्यवधान ( बफ़रिंग की वजह से ) सुन सकता हूँ । यूट्यूब वाले कई बार विडियो हटा देते हैं , तब भी आप द्वारा प्रकाशित विडियो अन्तर्ध्यान हो जाता है । इसके बाद मैं परेशान रहा कि इन्हें अपने चिट्ठे पर चढ़ाने की क्या तकनीक हो , उपाय हो ? 'ब्लॉगर' वाले लम्बे - लम्बे ब्लॉगर आई.डी दे कर 'समर्थन' से सम्पर्क का उपदेश दे रहे थे । इसी बीच हिन्दी चिट्ठेकारी की प्रणेताओं में एक श्री ई-स्वामी ने मुझे इसका समाधान बताया । प्रयोग उन्हींके नाम समर्पित है ।
प्रस्तुति पर राय विशेष रूप से आमंत्रित है ।