पुरुषों द्वारा बच्चों के लिए गाए गए गीत अत्यल्प हैं ।उनमें से एक गीत पेश है, किशोर कुमार का गाया,मुसाफ़िर फिल्म का (१९५७)
मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद, कोई आँख का तारा
हँसे तो भला लगे, रोये तो भला लगे
अम्मी को उसके बिना कुछ भी अच्छा ना लगे
जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
तुमको लगे मेरी उमर जियो मेरे लाल
मुन्ना बड़ा प्यारा ...
इक दिन वो माँ से बोला क्यूँ फूँकती है चूल्हा
क्यूँ ना रोटियों का पेड़ हम लगालें
आम तोड़ें रोटी तोड़ें रोटी\-आम खालें
काहे करे रोज़\-रोज़ तू ये झमेला
अम्मी को आई हंसी, हँसके वो कहने लगी
लाल मेहनत के बिना रोटी किस घर में पकी
जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
ओ जियो जियो जियो जियो जियो मेरे लाल
मुन्ना बड़ा प्यारा ...
एक दिन वो छुपा मुन्ना, ढूँढे ना मिला मुन्ना
बिस्तर के नीचे, कुर्सियों के पीछे
देखा कोना कोना, सब थे साँस खींचे
कहाँ गया कैसे गया सब थे परेशां
सारा जग ढूँढ सजे, कहीं मुन्ना ना मिला
मिला तो प्यार भरी माँ की आँखों में मिला
जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
ओ तुमको लगे मेरी उमर जियो मेरे लाल
मुन्ना बड़ा प्यारा ...
जब साँझ मुस्कुराये, पश्चिम में रंग उड़ाये
मुन्ने को लेके अम्मी दरवाज़े पे आ जाये
आते होंगे बाबा मुन्ने की मिठाई
लाते होंगे बाबा ...
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Saturday, May 24, 2008
Wednesday, April 23, 2008
बेक़रार दिल तू गाये जा
'दूर का राही ' फिल्म भी गजब की रही होगी ! कम से कम इसके गाने तो हैं ही गजब । किशोर कुमार ने सुलक्षणा पण्डित के साथ यह गीत गाया तो एक हलचल सी मच गयी थी । यहाँ प्रस्तुत विडियो की क्वालिटी घटिया है लेकिन धैर्य-पूर्वक एक बार 'बफ़रिंग' होने दें ,फिर सुनने का आनन्द मिलेगा । अशोक कुमार ,तनूजा और किशोर कुमार पात्र हैं ।
Wednesday, April 16, 2008
लाली है सवेरेवाली

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फिल्म अभी तो जी लें
संगीत सपन जगमोहन
गायक किशोर कुमार , आशा भोसले
गीत तू लाली है सवेरेवाली , गगन रंग दे ,तू मेरे मन का
जो सूरज तू मैं धरती तेरी
तू साथी है मेरे जीवन का
तेरे - मेरे बीच की मिटेगी कब दूरी
होती है कुछ तो सनम सभी की मजबूरी
तुम हो निगाहों में कब आओगी बाहों में
तुम में जो हिम्मत हो , मुझसे मुहब्बत हो
सबसे मुझे छीन लो ॥
तेरे ही फेरे करूँ,खिंची हुई मैं आऊँ
देखूँ तुझे दूर से गले ना लग पाऊँ
किसने तुम्हें रोका , कर लो वो जो सोचा
हँसी न उड़ाओ और न जलाओ
आँचल की तुम छाँव दो ॥
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