परसों तक विदुषी वीणा सहस्रबुद्धे विविध भारती के ’संगीत सरिता’ में ’तरानों’ से परिचय करा रही थीं । ज्यादातर हमारी काशी के पद्मश्री पंडित बलवन्तराय भट्ट जी द्वारा तैय्यार तराने सुनाये,उन्होंने ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।