Showing posts with label anuradhaa. Show all posts
Showing posts with label anuradhaa. Show all posts

Friday, May 16, 2008

'मैं तो हूँ जागी , मेरी सो गयी अँखिया'

जाने कैसे सपनों में खो गयी अखियाँ, मैं तो हूँ जागी मेरी सो गयी अखियाँ
अजब दिवानी भयी, मोसे अनजानी भयी,पल में परायी देखो हो गयी अखियाँ।।

बरसी ये कैसी धारा , काँपे तन मन सारा ।
रंग से अंग भिगो गयी अखियाँ ॥

मन उजियारा छाया , जग उजियारा छाया ।
जगमग दीप सँजो गयी अखियाँ ॥

पडित रविशंकर द्वारा संगीतबद्ध फिल्म अनुराधा का यह गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है ।
Get this widget | Track details | eSnips Social DNA