छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Saturday, August 29, 2020
दीवाली पर सप्रेम उपहार , दुर्लभ गीतों का
दिनेशरायजी की तरह दीवाली के अवसर पर मेरी बिटिया प्योली भी घर आई है । उसने दो तीन गीतों की फरमाईश कर दी जो मेरे जमाने के हैं और उसने बचपन में सुने हैं । बहुत मुश्किल हो गयी खोजने में । लेकिन मेहनत का फल मिला किसी न किसी रूप में । उम्मीद है आप सब इनका पूरा रस लेंगे । जिन्दगी को संवारना होगा आई ऋतु सावन कीचाँद अकेला जाए सखी रीनई री लगन और मीठी बतियां
Saturday, January 31, 2009
Monday, September 15, 2008
Wednesday, August 13, 2008
रात पिया के संग जागी रे सखी/जाँनिसार अख़्तर/मीनू पुरुषोत्तम
फिल्म प्रेम परबत के लिए यह गीत मीनू पुरुषोत्तम ने गाया है । गीत के बोल जाँनिसार अख़्तर के हैं और धुन जयदेव की । इस फिल्म का 'ये दिल और उनकी निगाहों के साए' ज्यादा चर्चित रहा है । सुधी श्रोता रस लेंगे :
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Sunday, July 20, 2008
कैसे उनको पाऊँ ,आली/ महादेवी वर्मा /आशा भोंसले/जयदेव
पिछली बार कबीर की बेटी कमाली का लिखा 'श्याम निकस गये, मैं न लड़ी थी' गीत प्रस्तुत किया था जिसे मेरे प्रिय रसिकों ने पसन्द किया। एचएमवी ने आशा भोंसले के गैर फिल्मी गीतों और गज़लों का एक एलपी जारी किया गया था,उक्त गीत उसमें था। उस तवे पर जयशंकर प्रसाद , महादेवी और निराला के गीत भी थे । सभी गीतों की धुन प्रख्यात संगीतकार जयदेव की बनायी है ।
यहाँ प्रस्तुत है उस संग्रह से महादेवी वर्मा का गीत - कैसे उनकों पाऊँ , आली
यहाँ प्रस्तुत है उस संग्रह से महादेवी वर्मा का गीत - कैसे उनकों पाऊँ , आली
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Saturday, July 5, 2008
मुजफ़्फ़र अली की 'गमन' के गीत
१९७८ में बनी ग़मन मुजफ़्फ़र अली द्वारा निर्देशित पहली फिल्म थी । इस फिल्म में संगीत के लिए जयदेव को १९७९ में सर्वोत्तम संगीत का पुरस्कार मिला था । सुरेश वाडकर , छाया गांगुली और हीरा देवी मिश्रा के गाये गीत दिल में जगह बना लेते हैं । 'सीने में जलन' शहरयार का लिखा है । 'नौशा अमीरों का' शादी के अवसर पर गाया जाने वाला एक पारम्परिक गीत है ।
Sunday, April 13, 2008
दो प्रेम गीत : प्रेम परबत ,हमराही से
मोहम्मद रफ़ी और मुबारक़ बेग़म का यह मधुर दोगाना, 'मुझको अपने गले लगा लो,ऐ मेरे हमराही', 'हमराही' फ़िल्म से लिया गया है । मुबारक़ बेग़म ने फिल्मों में कम गीत गायें हैं लेकिन उनकी एक विशिष्ट छाप है ।
प्रेम परबत फ़िल्म ज्यादा नहीं चली थी लेकिन जयदेव का दिया इसका संगीत लोकप्रिय हुआ था । प्रस्तुत गीत ( ये दिल और उनकी निगाहों के साए ) के अलावा एक अन्य मोहक गीत इस फ़िल्म में था : रात पिया के संग जागी रे सखी ।
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