गीता दत्त के गाए गीत मुझे पसन्द हैं । आप भी सुनिए :
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Monday, May 2, 2011
Wednesday, May 21, 2008
भाई का संगीत , बहन का मीठा स्वर
संगीतकार कानू रॉय प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त के भाई थे । हांलाकि उन्होंने फिल्मों में अभिनय( किस्मत . महल , जागृति , मुनीमजी , हम सब चोर हैं , तुमसा नहीं देखा , बन्दिनी ) भी किया लेकिन संगीतकार के रूप में उन्हें शायद ज्यादा याद किया जाता रहेगा ( उसकी कहानी , अनुभव , अविष्कार , गृहप्रवेश , स्पर्श )।
आगाज़ के रसिक श्रोताओं के लिए फिल्म अनुभव का यह गीत पेश है :
मेरी जाँ , मुझे जाँ न कहो मेरी जाँ
मेरी जाँ , मेरी जाँ,
जाँ न कहो अनजान मुझे
जान कहाँ रहती है सदा
अनजाने क्या जाने
जान के जाए कौन भला ॥
सूखे सावन बरस गये,
कितनी बार इन आँखों से।
दो बूँदें न बरसे,
इन भीगी पलकों से ॥
होंठ झुके जब होंठों पर
साँस उलझी हो साँसों में ।
दो जुड़वा होंठों की
बात कहो आँखों से ॥
( कृपया पहली बार यू ट्यूब को बफ़रिंग करने दें ,दूसरी बार में बिना व्यवधान सुनें,देखें । )
आगाज़ के रसिक श्रोताओं के लिए फिल्म अनुभव का यह गीत पेश है :
मेरी जाँ , मुझे जाँ न कहो मेरी जाँ
मेरी जाँ , मेरी जाँ,
जाँ न कहो अनजान मुझे
जान कहाँ रहती है सदा
अनजाने क्या जाने
जान के जाए कौन भला ॥
सूखे सावन बरस गये,
कितनी बार इन आँखों से।
दो बूँदें न बरसे,
इन भीगी पलकों से ॥
होंठ झुके जब होंठों पर
साँस उलझी हो साँसों में ।
दो जुड़वा होंठों की
बात कहो आँखों से ॥
( कृपया पहली बार यू ट्यूब को बफ़रिंग करने दें ,दूसरी बार में बिना व्यवधान सुनें,देखें । )
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