Showing posts with label mouth organ. Show all posts
Showing posts with label mouth organ. Show all posts

Thursday, September 4, 2008

'यही वो जगह है' / धुन जो स्पैम नहीं थी

' यही वो जगह है ' इस गीत की धुन ईमेल से मिली तब मैं थोड़ा चौंका । मुझे लगा मेरे एक ब्लॉग के नाम का 'संलग्नक' ( एक 'है' की कमी है ) , प्रेषक का नाम नचिकेता । परिचित नामों से भी स्पैम आ जाते हैं और यह तो मेरे सगे बड़े भाई का नाम था । तब तक भाई साहब ने बताया कि यह १९६६ की फिल्म 'वो रात फिर ना आयेगी' की धुन है , विश्वजीत और शर्मीला ठाकुर मुख्य कलाकार थे , १५ साल की अवस्था में ममेरे बड़े भाई कबीर चौधरी के साथ कटक में घर पर बिना बताए यह फिल्म देखी थी , कुछ जासूसी टाइप कहानी थी , पिक्चर चली नहीं थी लेकिन सभी गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे और विश्वजीत के देखादेखी इन्टरवेल में सिगरेट भी पी गई थी ।

किशोर वय के दोनों भाई आगे चल कर शौकिया संगीत से जुड़े़ । कबीर ने पहले गिटार और बाद में सरोद बजाना शुरु किया । नचिकेता ने माउथ ऑर्गन बजाना शुरु किया । नचिकेता ने गुजरात के माउथ ऑर्गन बजाने वालों के एक क्लब (कड़ी उनके लोकप्रिय ब्लॉग की है) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है । क्लब से जुड़े लोग सब शौकिया बजाने वाले हैं । बिना सहयोगी वाद्यों के धुन बजाते हैं । एक जापानी माउथ ऑर्गन निर्माता कम्पनी ने प्रतिमाह इस क्लब के ब्लॉग को दो हजार रुपए का विज्ञापन देना तय किया है ।


yeh hi voh jagah h...

Monday, July 28, 2008

'साज़ और आवाज़' की याद में

विविध भारती का एक कार्यक्रम हमें बहुत पसन्द था - 'साज़ और आवाज़'। एक गीत और उसके बाद किसी वाद्य यन्त्र पर उसी गीत की धुन पेश की जाती थी । यह कार्यक्रम शाम को प्रसारित होता था । रेडियो सिलोन पर भी ऐसा ही एक कार्यक्रम प्रसारित होता था । वाद्य यन्त्र पर धुन पेश करने वाले कलाकारों के भी हम कायल हुआ करते थे । पियानो एकॉर्डियन पर एनॉक डैनियल , मदन कुमार , मिलन गुप्ता मॉउथ ऑर्गन पर अथवा गिटार पर गांगुली धुनें पेश करते थे । शौकिया वाद्य यन्त्र बजाने वाले तो इन कार्यक्रमों को बिना नागा सुनते । लम्बे समय से यह कार्यक्रम बन्द कर दिए गए हैं । विविध भारती धुनों का इस्तेमाल जरूर करती है ,बिना कलाकारों का नाम उद्घोषित किए , अन्य कार्यक्रमों के बीच अन्तरालों में । जैसे एफ़एम के नए चैनल गीतकारों का नाम हजम कर जा रहे हैं , विविध भारती इन धुनों को बजाने वालों को श्रेय देना उचित नहीं समझ रही है ।
बहरहाल आगाज़ में आज हम साज और आवाज की स्मृति में काश्मीर की कली फिल्म का लोकप्रिय गीत दीवाना हुआ बादल पेश कर रहे हैं । मूल गीत के साथ कोलकाता के सुमन्त द्वारा माउथ ऑर्गन पर बजाई गई इस धुन को भी सुनना न भूलें। सुमन्त ३१ वर्ष के हैं और पिछले १७ वर्षों से शौकिया माउथ ऑर्गन बजा रहे हैं। पेशे से वे वेब डिज़ाइनर हैं ।