
उज्ज्वल भट्टाचार्य मेरे शहर बनारस की वामपंथी युवा राजनीति से जुड़े रहे । १९७९ से जर्मनी में जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के हिन्दी प्रभाग से जुड़े हैं । रेडियो पत्रकारिता के अलावा उज्ज्वल कविता और कहानी लिखते हैं । उन्होंने गेथे , हाइन , ब्रेख़्त , एनज़ेन्सबर्गर , ग्रास तथा हाइनर की रचनाओं के हिन्दी अनुवाद किए हैं तथा फ़ैज़ और रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कुछ रचनाओं के जर्मन में अनुवाद भी किए हैं । उज्ज्वल की जर्मन से अनुदित कवितायें - वतन की तलाश ( एरिक फ्रायड की कवितायें ) , भविष्य संगीत ( हान्स-मैग्नस एन्ज़ेन्सबर्गर की कविताएं) , एकोत्तरशती (ब्रेख़्त की १०१ कवितायें ), पता है तुम्हे उस देश का ( गेथे की कवितायें) प्रकाशित हो चुकी हैं ।
रेडियो जर्मनी डॉएचे वेले की साप्ताहिक सांस्कृतिक हिन्दी रेडियो पत्रिका ‘रंग तरंग’ में उज्जवल ने गत सोमवार को गांधीजी के सामानों की शराब तथा एयरलाइन्स व्यवसायी माल्या द्वारा बोली लगा कर खरीदने की चर्चा की । चर्चा का एक हिस्सा मुझसे बातचीत है । उक्त चर्चा की प्रस्तुति उनके जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के प्रति आभार प्रकट कर यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ । मैं प्रसारण के वक्त इसे नहीं सुन पाया था । लंका स्थित ‘गार्जियन’ रामजी टंडन ने प्रसारण सुना था और प्रसन्न हो कर मुझे खबर दी थी। टंडनजी पर कभी अलग से चर्चा की जाएगी ।
सुनिए जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के कार्यक्रम ‘रंग तरंग’ का यह अंक और अपनी राय भी प्रकट कीजिए -