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Saturday, July 11, 2009

जा रे बदरा बैरी जा / फिल्म - बहाना /लता/ मदन मोहन

पिछले साल इस ब्लॉग पर ऋतु अनुकूल गीतों की एक पोस्ट प्रस्तुत की थी । इस साल मानसून विलम्बित है फिर भी छिटपुट बदरा छाते ही कुछ मधुर धुनें बहकाने लगती हैं । आज १९६० में बनी फिल्म बहाना में लता मंगेशकर की आवाज में मदन मोहन द्वारा संगीत में ढाला गया यह गीत पेश कर रहा हूँ । कहते हैं , यह राग यमन कल्याण पर आधारित है ।

Friday, May 16, 2008

'मैं तो हूँ जागी , मेरी सो गयी अँखिया'

जाने कैसे सपनों में खो गयी अखियाँ, मैं तो हूँ जागी मेरी सो गयी अखियाँ
अजब दिवानी भयी, मोसे अनजानी भयी,पल में परायी देखो हो गयी अखियाँ।।

बरसी ये कैसी धारा , काँपे तन मन सारा ।
रंग से अंग भिगो गयी अखियाँ ॥

मन उजियारा छाया , जग उजियारा छाया ।
जगमग दीप सँजो गयी अखियाँ ॥

पडित रविशंकर द्वारा संगीतबद्ध फिल्म अनुराधा का यह गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है ।
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