Showing posts with label shaam. Show all posts
Showing posts with label shaam. Show all posts

Friday, August 22, 2008

'शाम' पर चार मधुर फिल्मी गीत

डी. वी. पलुस्कर को सुनने वाले जो हिन्दी चिट्ठों पर पहुंचते हैं , अभी कम हैं । ऐसे में फिल्मी गीत सुनें :



हुई शाम उनका खयाल आ गया - मेरे हमदम मेरे दोस्त 

 रोज शाम आती थी - इम्तेहान


 दिन ढल जाए - गाइड

 वो शाम कुछ अजीब थी - ख़ामोशी