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Monday, April 5, 2010

तू जी ऐ दिल जमाने के लिए/मन्ना डे/बादल/


खुदगर्ज़ दुनिया में ये,इंसान की पहचान है
जो पराई आग में जल जाये,वो इंसान है

अपने लिए जीए तो क्या जीए - २
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए

बाज़ार से जमाने के,
कुछ भी न हम खरींदेगे-२
हाँ, बेचकर खुशी अपनी औरों के गम खरीदेंगे
बुझते दिए जलाने के लिए-२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..

अपनी ख़ुदी को जो समझा,उसने ख़ुदा को पहचाना
आज़ाद फ़ितरतें इंसां, अंदाज़ क्या भला माना
सर ये नहीं झुकाने के लिए -२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..

हिम्मत बुलन्द है अपनी , पत्थर सी जान रखते हैं
कदमों तले ज़मीं तो क्या,
हम आसमान रख़ते हैं .
गिरते हुओं को उठाने के लिए
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए....

चल आफ़ताब लेकर चल,चल माहताब लेकर चल-२
तू अपनी एक ठोकर में सौ इंकलाब लेकर चल
जुल्म-ओ-सितम मिटाने के लिए
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए....

- जावेद अख़्तर नहीं जावेद अनवर
संगीतकार उषा खन्ना