डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है ।
इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बदाऊँ के हैं ।’ इस नयी दोस्ती के नाम पर आज की पोस्ट उस्ताद राशिद ख़ान द्वारा राग भटियार में गाया तराना है। कहते हैं , भटियार शब्द का मूल भतृहरि से है। इसके गायन का वक्त पौ फटते ही है ।
उस्ताद राशिद ख़ान के गायन का रस लीजिए :
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
Showing posts with label राशिद खान. Show all posts
Showing posts with label राशिद खान. Show all posts
Tuesday, October 20, 2009
Tuesday, February 10, 2009
पंडित भीमसेन जोशी व उस्ताद राशिद खान:राग शंकरा:परिचय उस्ताद विलायत खान
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन के दो शिखर पंडित भीमसेन जोशी और उस्ताद राशिद खान राग शंकरा प्रस्तुत कर रहे हैं । सितार की मूर्धन्य वादक उस्ताद विलायत ख़ान इस राग का परिचय करा रहे हैं । विलायत ख़ान साहब का ७८ आर.पी.एम का पहला रेकॉर्ड मात्र आठ साल की उम्र में जारी हुआ था तथा मृत्यु से पहले ७५ वर्ष की अवस्था में अन्तिम प्रस्तुति की ।
Labels:
bhimsen joshi,
raag shankara,
rashid khan,
vilayat khan,
भीमसेन जोशी,
राग शंकरा,
राशिद खान,
विलायत खान
Subscribe to:
Posts (Atom)