१९७८ में बनी ग़मन मुजफ़्फ़र अली द्वारा निर्देशित पहली फिल्म थी । इस फिल्म में संगीत के लिए जयदेव को १९७९ में सर्वोत्तम संगीत का पुरस्कार मिला था । सुरेश वाडकर , छाया गांगुली और हीरा देवी मिश्रा के गाये गीत दिल में जगह बना लेते हैं । 'सीने में जलन' शहरयार का लिखा है । 'नौशा अमीरों का' शादी के अवसर पर गाया जाने वाला एक पारम्परिक गीत है ।
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
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Saturday, July 5, 2008
Saturday, April 12, 2008
रस के भरे तोरे नैन , आप की याद आती रही रात भर
ग़मन फिल्म के दो अत्यन्त मर्मस्पर्शी गीत प्रस्तुत हैं । हीरादेवी मिश्रा का गाया हुआ 'रस के भरे तोरे नैन' तथा छाया गांगुली का गाया 'आप की याद आती रही रात भर'
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