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Sunday, August 17, 2008

ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

'कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे '-
उर्दू के क्रान्तिकारी कवि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की यह छोटी-सी , सरल किन्तु सशक्त कविता इस विडियो में अनवर क़ुरैशी द्वारा पढ़ी गयी है । सुनते/देखते हुए इन दोनों मुल्कों की सामाजिक और सियासी छबियाँ भी तिरने लगती हैं ।