छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
संगीत कम्पनी वायकॉम द्वारा यूट्यूब और गूगल के खिलाफ़ कॉपीराईट उल्लंघन के एक अरब डॉलर के दावे में न्यू यॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालत ने यूट्यूब और गूगल के पक्ष में फैसला दे दिया । अदालत ने कहा कि यह संभव नहीं है यूट्यूब जैसी सेवा देने वाली कम्पनी यह पता करे कि चढ़ाए गये विडियो से कॉपीराईट कानून का उल्लंघन हुआ है। विडियो कम्पनी यदि साबित कर दे कि कॉपीराईट उल्लंघन किया गया है तब उसे हटा लिया जाता है !
हमारी स्थिति भी यूट्यूब जैसी है । किशोरावस्था में बॉबी का छोटा वाला रेकॉर्ड (ई.पी.) बहुत जद्दोजहद के बाद खरीदा था और एस.एल.लोनी की प्लेन ट्रिग्नोमेट्री ,भाग एक के पांचवे अभ्यास का २६वां सवाल बिना किसी की मदद के हल कर लेने पर जीजाजी ने उस्ताद हाफ़िज़ अली खाँ का एक बड़ा रेकॉर्ड पुरस्कार स्वरूप दिया था । डिजिटल जमाने में संगीत या विडियो खरीद कर सुना / देखा नहीं है । अधिकांश इनटरनेट से इकट्ठा किया तथा कुछ डीवीडी भेंट स्वरूप मिल गये । दावा करने पर हटा लेने की शर्त मान कर हम भी संगीत प्रेमियों को इस ब्लॉग के मंच से कुछ पेश कर देते हैं ।
छ: - सात सौ गीतों में से कुछ छाँटना कितना कठिन होगा ! इस तरह की समस्या के लिए संगीत के गहन प्रेमी विनय जैन ने श्रोताओं के बीच ऑनलाईन सर्वेक्षण का तरीका अपनाया है । आज उस सर्वेक्षण की अंतिम तारीख थी ।
विनयजी जितना समर्पण और निष्ठा मुझ में नहीं है । हम ने यह गौर किया कि कम्प्यू्टर और आई-पॉड ने एक हिसाब रखा है - ’सर्वाधिक बजाये गये गीत ’। आज से किश्तों में पेश :
दिल क्यूँ ये मेरा शोर करे इधर नहीं उधर नहीं तेरी ओर चले
जरा देर में ये क्या हो गया नज़र मिलते ही कहाँ खो गया
भीड़ में लोगों की वो है वहाँ और प्यार के मेले में अकेला कितना हूं मैं यहाँ
शुरु हो गई कहानी मेरी मेरे दिल ने बात ना मानी मेरी हद से भी आगे ये गुजर ही गया खुद भी परेशां हुआ और मुझको भी ये कर गया ************************************** स्वर - केके फिल्म - काईट्स गीतकार नसीर फ़राज़ संगीत - राकेश रौशन
खुदगर्ज़ दुनिया में ये,इंसान की पहचान है जो पराई आग में जल जाये,वो इंसान है
अपने लिए जीए तो क्या जीए - २ तू जी ऐ दिल जमाने के लिए अपने लिए
बाज़ार से जमाने के, कुछ भी न हम खरींदेगे-२ हाँ, बेचकर खुशी अपनी औरों के गम खरीदेंगे बुझते दिए जलाने के लिए-२ तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए अपने लिए..
अपनी ख़ुदी को जो समझा,उसने ख़ुदा को पहचाना आज़ाद फ़ितरतें इंसां, अंदाज़ क्या भला माना सर ये नहीं झुकाने के लिए -२ तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए अपने लिए..
हिम्मत बुलन्द है अपनी , पत्थर सी जान रखते हैं कदमों तले ज़मीं तो क्या, हम आसमान रख़ते हैं . गिरते हुओं को उठाने के लिए तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए अपने लिए....
चल आफ़ताब लेकर चल,चल माहताब लेकर चल-२ तू अपनी एक ठोकर में सौ इंकलाब लेकर चल जुल्म-ओ-सितम मिटाने के लिए तू जी ऐ दिल जमाने के लिए अपने लिए....
अमेरिका में चले नागरिक - अधिकार आन्दोलन के नेता माटिन लूथर किंग महात्मा गांधी से प्रभावित थे । उनका जनम दिन १५ जनवरी को पड़ता है लेकिन अमेरिकी जनता इसे हमेशा निकट के सोमवार को मनाती है । गत शुक्रवार को वे ८१ वर्ष के होते। उनकी हत्या ४ अप्रैल १९६८ को हुई । आज उनके अभियान से जुड़े़ तीन गीतों के विडियो तथा ट्विटर पर आ रही उनकी हजारों सूक्तियों में से कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
इस गीत में रंगभेद को एक हौसले और साथ ही व्यंग्य के साथ चुनौती दी गयी है । गायक पीट सीगर हैं । अश्वेत प्रार्थना ’ वी शाल ओवरकम ’ न सिर्फ़ नागरिक अधिकार आन्दोलन का मुख्य गीत बना अपितु अन्य देशों , अन्य भाषाओं में भी जन आन्दोलन में बतौर आवाहन गीत ( हम होंगे कामयाब ) लोकप्रिय हुआ :
पीट सीगर की तरह जोन बाएज़ भी नागरिक अधिकार तथा शान्ति आन्दोलन की प्रमुख हस्ती रही हैं और गायिका भी । उनके स्वर में :
ट्विटर पर आ रहे हजारों सन्देशों और सूक्तियों में से कुछ : वे एक खाँटी नेता थे जो सर्व सम्मति की तलाश नहीं करता था उसका निर्माण करता था । ’सही काम करने के लिए हर वक्त सही होता है । ’”किसी मक़सद के लिए न मरने वाला व्यक्ति जीने के लायक नहीं । ’ मेरे तथा मेरे जैसे तमाम अफ़्रीकी-अमेरिकनों के लिए जहां हम पहुंचे हैं उसका मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें प्रणाम । ’ यह न भूलना कि हिटलर ने जर्मनी में को भी किया एक आईन के तहत किया । ’ ’ जीवन का सबसे जरूरी सवाल ,"तुम दूसरों के लिए क्या कर रहे हो ’ ’ प्रेम वह एकमेव ताकत है जो दुश्मन को दोस्त में बदल दे ’ ’ शान्ति सिर्फ़ एक दूरस्थ लक्ष्य नहीं , उसे हासिल करने का साधन भी है ’ ’ चुपचाप जुल्म को कबूल लेने वाला उससे कम दोषी नहीं जो जुल्म का षड़यन्त्र रचता है ’ ’ अंधेरा अंधेरे को भगा नहीं सकता,सिर्फ़ प्रकाश भगा सकता है । नफ़रत नफ़रत को खत्म नहीं कर सकती सिर्फ़ प्रेम कर सकता है । ’ ’जिन्दगी में महत्व रखने वाले मुद्दों पर जिस दिन हम चुप्पी साधना शुरु करते हैं ,उस दिन जिन्दगी के अन्त की शुरुआत हो जाती है ’ तीन सम्बन्धित पोस्ट : तीन बागी गायक
पता नहीं मैं रॉक संगीत समझता था या नहीं । कितना सुना था इसका भी अन्दाज न था । भारत में इण्डियन ओशन जैसे बैण्ड तथा पाकिस्तान के कुछ बैण्ड्स के आने के बाद मेरे जैसों के लिए इस विधा के दरवाजे खुले । बहुत कुछ कर्णप्रिय लगा , समझ में भी आया और स्पन्दित कर गया । इस विप्लवी-से संगीत से मेरी घनिष्टता और परिचय अगली पीढ़ी के कारण हुआ । भारतीय रॉक प्रेमियों के लिए २५ दिसम्बर , २००९ का दिन दु:खद रहा । ’इण्डियन ओशन’ नामक बैण्ड के प्रमुख और पुराने सदस्य अशीम चक्रवर्ती की ५२ साल की अवस्था में हृदय आघात से मृत्यु हो गयी । अशीम इस फ़्यूजन रॉक बैण्ड के संस्थापक सदस्यों में थे । उनकी नीचे के सप्तक और ऊपर के सप्तक के बीच का विस्तार असीम था । उन्होंने विज्ञापन का काम छोड़कर यह बैण्ड बनाया ।
मैं जिन गीतों से प्रभावित हुआ हूँ , उन्हें यहाँ पेश कर रहा हूँ । दोनों गीतों के बोलों को सुन कर काफ़ी सूफ़ी / निर्गुण सा लगता है । अपनी राय दीजिएगा । अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में उनका गीत लिया था (बन्दे-यह गीत पेश है) । दूसरा गीत गुलाल से है,अशीम के साथ राहुल राम का स्वर है ।
भटियाली वे बांग्ला नौकागीत हैं जो भाटा के दौरान नाविक गाया करते हैं , नदी की बहने की स्वाभाविक दिशा में । भटियाली - धुन इतनी मधुर और लोकप्रिय है की गीतों के अलावा प्रख्यात वादकों ने इन्हें सितार ,सरोद और बाँसुरी पर बजाया है । भटियाली में रवीन्द्र संगीत भी है । अन्य भारतीय भाषाओं में भी भटियाली धुनें अपनाई गई हैं । यहाँ भटियाली की दो धुनों पर दो हिन्दी फिल्मी गीत,सितार पर उस्ताद विलायत खान की बजाई एक धुन तथा रुना लैला का गाया एक बांग्ला लोक गीत है । गौर कीजिएगा धुनें दो हैं,दोनों भटियाली ।
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली
नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा
आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला
गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का 'ऐ मेरे प्यारे वतन' लिखा है)
जोगी ठाकुर का लिखा गीत तरुणाई से लबरेज गाड़ीवान गा रहा है । जोगी ठाकुर ही इतना डूब के सुन रहे हैं ,उसे पता नहीं है । स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद
आज रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर गीत चढ़ाने वाले शौकीनों के लिए ’खुले स्रोत ’ का उपाय सोदाहरण बताया है । दो बार असफल होने के बावजूद उदास नहीं हुआ , फलस्वरूप यह उम्मीद पैदा करने वाला गीत आप सबके लिए प्रस्तुत हो सका । दिल नाकामयाब भले ही हो, नाउम्मीद न हो - आप सब के लिए यह कामना है । रवि भाई को समर्पित
डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है । इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बदाऊँ के हैं ।’ इस नयी दोस्ती के नाम पर आज की पोस्ट उस्ताद राशिद ख़ान द्वारा राग भटियार में गाया तराना है। कहते हैं , भटियार शब्द का मूल भतृहरि से है। इसके गायन का वक्त पौ फटते ही है । उस्ताद राशिद ख़ान के गायन का रस लीजिए :
तुम अपना रंज-ओ-ग़म ,अपनी परेशानी मुझे दे दो । तुम्हें ग़म की कसम , इस दिल की वीरानी मुझे दे दो । ये माना मैं किसी का़बिल नहीं हूँ इन निग़ाहों में । बुरा क्या है अग़र , ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो । मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है । कोई इनके लिए अपनी निगेबानी मुझे दे दो । वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था । बड़ी इनायत है अग़र उसकी पशेमानी मुझे दे दो । - फिल्म - शग़ुन (१९६४) , गीतकार - साहिर लुधियानवी ,गायिका - जगजीत कौर, संगीत- खैय्याम