बैजू बावरा फिल्म में पक्का गायन तानसेन के लिए उस्ताद अमीर खान और बैजू बावरा के लिए पण्डित डी. वी. पलुस्कर ने किया था । विविध भारती पर उस्ताद अमीर खान के गाई इस बन्दिश को नहीं सुना । संगीत निर्देशक नौशाद हैं । यहाँ रस लीजिए :
तोरी जय जय करतार (२)
मोरी भर दे आज झोलिया
तू रहीम दाता तू पाक किरतिकार
तोरी जय जय करतार
तानसेन को तू रब , ज्ञान ध्यान दीजो सब
तानसेन को तू रब ( आलाप )
राग रंग सागर है कर दे नैय्या पार
~~~~~~~~~~~~~~~~
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
Monday, July 20, 2009
Saturday, July 18, 2009
आज सिर्फ़ मन्दीजन्य मरम्मत
कल ही प्रिय मित्र प्रियंकर ने बताया कि उनका प्रिय एक गीत लाइफ़लॉगर खा गया ! गत मकर संक्रांति के दिन इस ब्लॉग पर एक पोस्ट इस विषय पर लिखी थी । तब इस बात का अन्दाज ही नहीं था कि लाईफ़लॉगर जैसी सेवा न केवल नये गीतों को चढ़ाने के लिए मृत है अपितु गैर-मंदी दौर में इस पर चढ़ाये गीत भी साईबर व्योम में डूब गये हैं । फलस्वरूप अच्छी भली पोस्ट गीत/कविता विहीन हो गयी हैं । उन पर भूले भटके जो भी पहुँचता होगा वह अब सिर्फ़ पाठक होगा श्रोता नहीं ! यह उसके साथ घोर अन्याय है।
अत: उन पोस्टों में पड़ी लाईफ़लॉगर की लाइफविहीन एम्बेडिंग कोड को हटा कर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है । इस मरम्मत को तरजीह दें,गुजारिश है ।
दरियाव की लहर : कबीर का गीत
हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का एक हिन्दी गीत
शाम सहमी न हो , रात हो न डरी , भोर की आंख फिर डबडबायी न हो
बाकी मरम्मत फिर कभी ।
अत: उन पोस्टों में पड़ी लाईफ़लॉगर की लाइफविहीन एम्बेडिंग कोड को हटा कर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है । इस मरम्मत को तरजीह दें,गुजारिश है ।
दरियाव की लहर : कबीर का गीत
हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का एक हिन्दी गीत
शाम सहमी न हो , रात हो न डरी , भोर की आंख फिर डबडबायी न हो
बाकी मरम्मत फिर कभी ।
Friday, July 17, 2009
मन मोर हुआ मतवाला / सचिनदेव बर्मन / नरेन्द्र शर्मा / सुरैय्या /
पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम बारिश होने के बावजूद दो बार मोर को मतवाले होते देख पाया । पहली बार तो एक बच्चा (मानव)पहले दिखा । कितना अचंभित,अभिभूत ! पहली बार मोर को नाचते हुए देखा होगा।
अफ़सर फिल्म (१९५०) के इस सुरीले गीत में नरेन्द्र शर्मा, सचिनदेव बर्मन और सुरैय्या सबका अपूर्व योगदान है :
सैंकड़ों पुराने गीतों के दो डीवीडी सागर नाहर ने मुझे भेट दिए । उनमें से एक में है , यह ।
अफ़सर फिल्म (१९५०) के इस सुरीले गीत में नरेन्द्र शर्मा, सचिनदेव बर्मन और सुरैय्या सबका अपूर्व योगदान है :
सैंकड़ों पुराने गीतों के दो डीवीडी सागर नाहर ने मुझे भेट दिए । उनमें से एक में है , यह ।
Thursday, July 16, 2009
तोसे नैना लागे रे, पिया साँवरे
कल ही एक मित्र के ईस्नाइप के फोल्डर में सुना । मित्र समीरलाल को समर्पित ।
मोरा सैंया मो से बोले ना !
यह गीत जरूर सुनें । इस गीत के बारे में कोई सूचना दे सकें तो और खुशी होगी ।
Monday, July 13, 2009
बादल देख डरी / मीरा / वाणी जयराम / पण्डित रविशंकर
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरी
श्याम मैं बादल देख डरी
काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यो एक घरी
जित जाऊं तित पाणी पाणी हुई सब भोम हरी
जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी
मीरा के प्रभु गिरधर नागर कीजो प्रीत खरी
श्याम मैं बादल देख डरी
मीराबाई के इस पद को ज्युथिका राय से लगायत कई गायिकाओं और गायकों ने भी गाया है । मशहूर ब्लॉगर ने ज्युथिका राय का गाया ’ गीतों की महफ़िल ’ में पहले पेश किया था। गुलजार की बनाई ’ मीरा’ फिल्म में पण्डित रविशंकर का संगीत है और इस पद को वाणी जयराम ने गाया है । वाणी जयराम का गाया मेरी पत्नी डॉ. स्वाति गुनगुनाती हैं और ’जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी ’ की तर्ज पर हमें भीजता छोड़ लम्बे अध्ययन अवकाश पर जा रही हैं ।
श्याम मैं बादल देख डरी
काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यो एक घरी
जित जाऊं तित पाणी पाणी हुई सब भोम हरी
जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी
मीरा के प्रभु गिरधर नागर कीजो प्रीत खरी
श्याम मैं बादल देख डरी
मीराबाई के इस पद को ज्युथिका राय से लगायत कई गायिकाओं और गायकों ने भी गाया है । मशहूर ब्लॉगर ने ज्युथिका राय का गाया ’ गीतों की महफ़िल ’ में पहले पेश किया था। गुलजार की बनाई ’ मीरा’ फिल्म में पण्डित रविशंकर का संगीत है और इस पद को वाणी जयराम ने गाया है । वाणी जयराम का गाया मेरी पत्नी डॉ. स्वाति गुनगुनाती हैं और ’जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी ’ की तर्ज पर हमें भीजता छोड़ लम्बे अध्ययन अवकाश पर जा रही हैं ।
Saturday, July 11, 2009
जा रे बदरा बैरी जा / फिल्म - बहाना /लता/ मदन मोहन
पिछले साल इस ब्लॉग पर ऋतु अनुकूल गीतों की एक पोस्ट प्रस्तुत की थी । इस साल मानसून विलम्बित है फिर भी छिटपुट बदरा छाते ही कुछ मधुर धुनें बहकाने लगती हैं । आज १९६० में बनी फिल्म बहाना में लता मंगेशकर की आवाज में मदन मोहन द्वारा संगीत में ढाला गया यह गीत पेश कर रहा हूँ । कहते हैं , यह राग यमन कल्याण पर आधारित है ।
Thursday, July 2, 2009
तीन सदाबहार कव्वालियां
तीन सदाबहार फिल्मी कव्वालियाँ प्रस्तुत हैं । लोग- बाग पसन्द करेंगे तो और पेश करने का साहस करूँगा । इन कव्वालियों का रुहानी अर्थ पहले नहीं दिखता था । यह मत सोचिएगा कि बुढ़ौती का परिणाम है- दिखने लगना । लोकनायक जयप्रकाश बताते थे कि किशोर और तरुणों के लिए भी आध्यात्मिकता की तमाम मिसालें दे कर ।
ये है इश्क - इश्क
न तो कारवाँ की तलाश है
कहीं दाग न लग जाए
Wednesday, July 1, 2009
रफ़ी और अनेक
Sunday, June 28, 2009
येसूदास के आठ मधुर गीत
येसुदास के हिन्दी फिल्मी गीतों का दौर । बहुत आनन्ददायक दौर । क्या किसी क्षेत्रवादी साजिश के कारण उन्होंने हिन्दी फिल्मों गीतों में गाना बन्द कर दिया था ? अज़दक भाई शायद बता दें । या युनुस बतायें ।
| Powered by eSnips.com |
Saturday, April 25, 2009
ये पाँच सालों का देने हिसाब आये हैं
कमलेश्वर और गुजराल की फिल्म आँधी आपातकाल के दौरान आई थी । इसे अलिखित तौर पर रोक दिया गया था । इस गीत में सुचित्रा सेन की चाल से आपको इन्दिरा गाँधी की चाल नहीं याद आती ?
Thursday, April 23, 2009
Tuesday, April 21, 2009
' विरह विथा का को कहूं सजनी '
Saturday, April 11, 2009
Monday, April 6, 2009
राग देश में तराना : उस्ताद राशिद खान
परसों तक विदुषी वीणा सहस्रबुद्धे विविध भारती के ’संगीत सरिता’ में ’तरानों’ से परिचय करा रही थीं । ज्यादातर हमारी काशी के पद्मश्री पंडित बलवन्तराय भट्ट जी द्वारा तैय्यार तराने सुनाये,उन्होंने ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।
|
Tuesday, March 31, 2009
Tuesday, March 24, 2009
ओ रसिया मोरे पिया , छीन ले गयो रे जिया
१९६९ में बनी प्रार्थना फिल्म का यह गीत आशा भोंसले ने गाया है और हृदयनाथ मंगेशकर का संगीत है । इस धुन पर पहले एक मराठी गाना बना था - 'येरे घना,येरे घना' जो हिन्दी गीत से ज्यादा लोकप्रिय हुआ था।
| Powered by eSnips.com |
Sunday, March 22, 2009
काजोल की माँ का मजेदार गीत
तनुजा ( काजोल की माँ ) पर गाया एक मजेदार गीत । शैलेन्द्र का लिखा , सलिल चौधरी द्वारा संगीतबद्ध ।
Saturday, March 21, 2009
सच हुए सपने तेरे / काला बाजार / आशा भोंसले
सच हुए सपने तेरे झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
बेकल मन का धीरज लेकर मेरे साजन आये
जैसे कोई सुबह का भूला साँझ को घर आ जाए
प्रीत ने रंग बिखेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
मन की पायल छम छम बोले,हर एक साँस तराना
धीरे धीरे सीख लिया अंखियोंने मुसकाना
हो गए दूर अँधेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
जिस उलझन ने दिल उलझाके सारी रात जगाया
बानी है वो आज प्रीत की माला मन का मीत मिलाया
जगमग साँझ सवेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
बेकल मन का धीरज लेकर मेरे साजन आये
जैसे कोई सुबह का भूला साँझ को घर आ जाए
प्रीत ने रंग बिखेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
मन की पायल छम छम बोले,हर एक साँस तराना
धीरे धीरे सीख लिया अंखियोंने मुसकाना
हो गए दूर अँधेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
जिस उलझन ने दिल उलझाके सारी रात जगाया
बानी है वो आज प्रीत की माला मन का मीत मिलाया
जगमग साँझ सवेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा
Subscribe to:
Posts (Atom)