कबीर की बेटी कमाली की रचना को आशा भोंसले स्वर में सुनें :
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भाषाई देहातीपन शहरी भद्रलोक का
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... टीवी चैनलों के मीडियाकर्मियों को शायद इस बात का एहसास नहीं है कि जिस
हिन्दी के बूते वे इस सशक्त माध्य...
2 hours ago



6 comments:
अरे आशा भौंसले ने भी गाया है इसे?
मैंने तो इसे लोक गीत के रूप में बहुत पहले बचपन में सुना था!
बहुत सुमधुर है ये!
अद्भुत है! धन्यवाद सर!
बहुत सुन्दर. हम तो इसे सत्यम शिवम सुन्दरम फिल्म का एक गाना बस जानते थे. यह तो पहली बार सुन रहे हैं..आप के पास भी खजाना है.
shukriyaa...ashaa ki avaaz me pehli baar sunaa ise..
परेशानी के आलम में कम से कम यहां तो सुकून मिला
लाज़बाव
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