छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
“नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार - बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार ! निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं , बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !! “
3 comments:
बहुत सुन्दर वन्दना
“नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !! “
हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल
Its a very powerful prayer. Impressive Rendition.
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