Saturday 21 November 2009

जीवन से लम्बे हैं बन्धु , ये जीवन के रस्ते /मन्ना डे/गुलजार/आशीर्वाद/वसन्त देसाई

जोगी ठाकुर का लिखा गीत तरुणाई से लबरेज गाड़ीवान गा रहा है । जोगी ठाकुर ही इतना डूब के सुन रहे हैं ,उसे पता नहीं है ।
स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद




5 comments:

  1. पूरा ब्लॉग ही ढंक गया है । प्लेयर छोटा नहीं हो सकता ?
    बतायें तब सुनूँगा ।

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  2. इन गीतों के खरेपन में ज़िन्दगी के सच थे.
    अब तो बस शोर है...
    कुछ सुनने की चेष्टा करो तो बहरापन ज़्यादा सुहाना लगता है...

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  3. Purane geeton ki baat hi nirali thi, aaj ke kanfodu sangeet ka to khuda hi maalik hai. Kab aaye kab gaye pata hi nahi chalta.....
    Badhai.

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