Friday 11 September 2009

मुकेश के दो प्रेरक गाने



ऐ दिले आवारा चल ,फिर कहीं दोबारा चल ।
यार ने दीदार का वादा किया है ।
, डॉ. विद्या नामक फिल्म से ।

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’गर्दिश में हों तारे , ना घबड़ाना प्यारे’ , फिल्म रेशमी रुमाल

दोनों ही गीत विविध भारती पर सुबह - सुबह सुने । ऐसे गीतों को नियमित रूप से सुनने के लिए जरूरी है कि ट्रांजिस्टर नामक पुरानी टेक्नॉलॉजी का यन्त्र ( नए चले एफ़ एम बैण्ड सहित ) रखा जाए ।
एक सवाल विविध भारती के मित्रों से जरूर है । हमारे शहर बनारस में एफ़ एम पर विविध भारती है लेकिन उसमें निजी चैनलों की तरह स्टीरियो-असर क्यों नहीं सुनाई पड़ता ? अपनी तमाम मजबूतियों के अलावा इस पर ध्यान देना होगा ।

8 comments:

हिमांशु । Himanshu said...

मुकेश के इन गीतों की प्रस्तुति का आभार । सही कह रहे हैं आप - विविध भारती पता नहीं क्यों झनझनाता नहीं लगता । वही स्टीरियो-असर !

संजय तिवारी ’संजू’ said...

Good.

Dipti said...

दोमों ही गाने बहुत ख़ूबसूरत है। ये गाने अब तो सिर्फ़ विविध भारती पर ही सुन सकते हैं। निजी रेडियो तो केवल ढिन चेक ही चलाते है।

Nirmla Kapila said...

बहुत् सुन्दर गीत है गर्दिश मे हों तारे मेरा बहुत मनपसंद गीत है शन्यवाद । ये ब्लाग तो आज देखा बहुत सा खजाना भरा पडा है इसमे सुनते रहेंगे आभार आपका ब्लाग खुलने मे बहुत देर लगती है । पता नहीं कयों

अमिताभ मीत said...

बहुत दिनों बाद सुने ये गाने .... विविध भारती नहीं सुनता हूँ न !! शुक्रिया !!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

लाजवा गीत सुनवाए आपने, आभार।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

काव्या शुक्ला said...

बहुत ही सुंदर गीत हैं, मन को सुकून देते हैं।
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

दिलीप कवठेकर said...

बढिया गीत सुनवाये. धन्यवाद .

विविध भारती के एफ़ एम के प्रसारण की मशिनरी पुरानी है इनके बनिस्बत. वैसे भी पुराने गीत स्टीरीयो तकनीक से रिकोर्ड नहीं हुए थे, अतः नये स्टेशनों पर भी ऐसे ही बजेंगे.