Tuesday 19 August 2008

भजन / पलुस्कर / ई-स्वामी के नाम

डी. वी. पलुस्कर के गायन की प्रस्तुति पूर्व में भी की थी । इस बार ज्यादा प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत हैं । बरसों बाद लताजी ने भी इन भजनों को उन्हीं धुनों में गाया ।
इस बार यह भजन विडियो के रूप में मिले थे , जिन्हें मैंने डाउनलोड किया रियल प्लेयर की मदद से । इससे मैं उन्हें बिना व्यवधान ( बफ़रिंग की वजह से ) सुन सकता हूँ । यूट्यूब वाले कई बार विडियो हटा देते हैं , तब भी आप द्वारा प्रकाशित विडियो अन्तर्ध्यान हो जाता है । इसके बाद मैं परेशान रहा कि इन्हें अपने चिट्ठे पर चढ़ाने की क्या तकनीक हो , उपाय हो ? 'ब्लॉगर' वाले लम्बे - लम्बे ब्लॉगर आई.डी दे कर 'समर्थन' से सम्पर्क का उपदेश दे रहे थे । इसी बीच हिन्दी चिट्ठेकारी की प्रणेताओं में एक श्री ई-स्वामी ने मुझे इसका समाधान बताया । प्रयोग उन्हींके नाम समर्पित है ।
प्रस्तुति पर राय विशेष रूप से आमंत्रित है ।

5 comments:

  1. आपका प्रयोग सफल रहा, वीडियो देख रहा हूँ.

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  2. आपका प्रयास बहुत शानदार रहा।
    मेरे लिये उससे भी ज्यादा अच्छी बात यह रही कि पं पुलस्कर को सुन सका। तन मन आनंदित हो गया।
    चलिये हम भी आपको ऐसा ही सुंदर शास्त्रीय गीत बहुत जलदी सुनवाते हैं।

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  3. देखा आसान था ना! :)
    आपके मुख्य कडी पर आते ही २-३ प्लेयर आटो प्ले मोड मे होने से बज जाते हैं. उन्हें सेट कर दें.

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  4. पण्डित जी के इन भक्ति पदों को बचपन से सुनते आए हैं आप-हम सब ने कितनी बार आकाशवाणी के क्षेत्रिय प्रसारण में सुबह वंदना कार्यक्रम में न जाने कितनी बार सुना है. मुझे तो लगता है पंडितजी के इन पदों की वजह से मैने तो तुलसीदास जी का नाम ज़्यादा जाना,रामचरितमानस से बाद में.
    कभी तिलक कमोद (कोयलिया) भी सुना दीजिये न....नया प्लेयर मुबारक ..कभी हम भी सीख लेंगे आपसे....

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