Sunday 17 August 2008

ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

'कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे '-
उर्दू के क्रान्तिकारी कवि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की यह छोटी-सी , सरल किन्तु सशक्त कविता इस विडियो में अनवर क़ुरैशी द्वारा पढ़ी गयी है । सुनते/देखते हुए इन दोनों मुल्कों की सामाजिक और सियासी छबियाँ भी तिरने लगती हैं ।

3 comments:

  1. एक लाख बार पढ़ी है ये रचना .... इतनी पसंद है मुझे. लेकिन इसे इस अंदाज़ से, इस रौशनी में पेश करने के बहुत बहुत शुक्रिया.

    अगर मूड बने तो एक पोस्ट यहाँ देखियेगा :

    http://kisseykahen.blogspot.com/2008/06/blog-post_14.html

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  2. एक अच्छी पोस्ट है ..शुक्रिया ...

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  3. यूं तो फैज साहब को पढ़ा बहुत पर नए अंदाज के लिए अनवर जी और आपका शुक्रिया। नेरेशन भी अच्छा लगा अनवर मियां।

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