Monday 4 August 2008

झमकी झुकी आई बदरिया / डॉ. अनीता सेन

डॉ. श्रीमती अनीता सेन द्वारा पिछले दिनों विविध भारती पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा था । उनके गायन का प्रभाव ऐसा पड़ा कि खोज शुरु कर दी । सफलता भी मिली । 'आगाज़ ' के रसिक श्रोताओं की खिदमत में पेश है यह ऋतुअनुकूल प्रस्तुति - कजरी

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7 comments:

  1. अनीता जी की गाई कजरी 'झमकि झुकि आई बदरिया.....' ने आनंद से भर दिया .

    बहुत-बहुत आभार !

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  2. क्या बात है, आज सुबह ही हम भाभी (1938) का गाना सुन रहे थे पारूल घोष की आवाज में .. झुकी आई रे बदरिया... और लीजिये आपने वह गीत डॉ अनीता जी की आवाज में सुनवा भी दिया। :)

    धन्यवाद

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  3. shukriya nahin suna tha kabhi ise. achcha laga sunkar.

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  4. shukriya nahin suna tha kabhi ise. achcha laga sunkar.

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  5. आप तो बहुतै बड़े खोजी निकले । धन्‍नबाद जी धन्‍नबाद ।

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  6. सुरीली तो है ही, सामयिक भी है.
    खिड़की से दिख रही बूंदा बादीं में इसे सुनना एक स्वर्गिक अनुभव है.

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  7. अनीता जी की कजरी ने मन मोह लिया !आपको कोटिश; धन्यवाद ,इतने अच्छे गीत संगीत के लिए !

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