Tuesday 20 May 2008

फ़िराक की गज़ल , चित्रा सिंह की आवाज़

प्रसिद्ध शायर फ़िराक गोरखपुरी की गज़ल । प्रसिद्ध गज़ल गायिका चित्रा सिंह के स्वर में ।

8 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर गज़ल है। काफी रूक-रूक कर चल रही थी फिर भी सुनकर आनन्द आगया। चित्रा जी की और भी गज़लें सुनवाएँ।

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  2. बहुत सुंदर .हमेशा से पसंद है यह गजल मुझे शुक्रिया इसको सुनाने के लिए

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  3. पहली बार ही रुकावट होगी ,दूसरी बार बिना रुकावट सुन पायेंगे ।

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  4. बरसों पहले सुनी ग़ज़ल को एक बार फ़िर सुनवाने का शुक्रिया.
    नीरज

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  5. चित्रा सिंह की आवाज़ हमें भी बहुत पसंद है. उनकी गाई तकरीबन सभी ग़ज़लें और भजन हमारे कलेक्शन में हैं. अफ़सोस कि व्यक्तिगत कारणों से अब उन्होंने गाना बंद कर रखा है.

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  6. ये हम सुननेवालों की बदक़िस्मती है कि आजकल चित्राजी सुनाईं नहीं देतीं.फ़िराक़ साहब की इस ग़ज़ल में चित्राजी की आवाज़ का फ़ोर्स सुनने क़ाबिल है.हमने चित्राजी के रूप मे
    ग़ज़ल गायकी का दमकता हीरा पाया है.और जगजीतजी की कम्पोज़िशन के क्या कहने.यहीं से ग़ज़लों का नया दौर शुरू हुआ था और बज़ने लगे थे सारंगी,हारमोनियम और तबले से हटकर कुछ नये साज़..जैसे मेंडोलिन,गिटार,वॉयलिन,की-बोर्ड,संतूर आदि.

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