Friday, 16 May, 2008

'मैं तो हूँ जागी , मेरी सो गयी अँखिया'

जाने कैसे सपनों में खो गयी अखियाँ, मैं तो हूँ जागी मेरी सो गयी अखियाँ
अजब दिवानी भयी, मोसे अनजानी भयी,पल में परायी देखो हो गयी अखियाँ।।

बरसी ये कैसी धारा , काँपे तन मन सारा ।
रंग से अंग भिगो गयी अखियाँ ॥

मन उजियारा छाया , जग उजियारा छाया ।
जगमग दीप सँजो गयी अखियाँ ॥

पडित रविशंकर द्वारा संगीतबद्ध फिल्म अनुराधा का यह गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है ।
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4 comments:

shashank said...

एक और बेहतरीन गीत ! धन्यवाद।

शोभा said...

बहुत ही सुन्दर और मधुर गीत। आनन्द आगया। इतना मधुर गीत सुनवाने के लिए धन्यवाद। सस्नेह

Lavanyam - Antarman said...

सुँदर सुरीला गीत सुनवाने का शुक्रिया !
- लावण्या

Manish said...

बेहद मधुर गीत सुनवाया आपने! मैंने पहली बार सुना इसे। कोटिशः धन्यवाद !