Tuesday 29 April 2008

कहाँ से आए बदरा : इंदु जैन:येशू दास हेमंती शुक्ला

एक पंक्ति ने सूचित किया कि गीतकार इंदु जैन नहीं रहीं । फिल्म चश्मेबद्दूर में उनका रचित यह गीत येशूदास और हेमंती शुक्ला ने गाया है ।

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कहाँ से आए बदरा
घुलता जाए कजरा

पलकों के सतरंगे दीपक
बन बैठे आँसू की झालर
मोती का अनमोलक हीरा
मिट्टी में जा फिसला ॥
नींद पिया के संग सिधारी
सपनों की सुखी फुलवारी
अमृत होठों तक आते ही
जैसे विष में बदला ॥

उतरे मेघ या फिर छाये
निर्दय झोंके अगन बढ़ाये
बरसे हैं अब तोसे सावन
रोए मन है पगला ॥

4 comments:

  1. क्या बात है आजकल आप बहुत ही बढ़िया गाने सुनवा रहे है।

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  2. इंदु जैन जी के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता। वैसे ये गीत तो मुझे हमेशा से पसंद रहा है।

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  3. मेरे कुछ पसदीदा गीतों मे से एक.

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  4. बहुत सुन्दर गीत ! धन्यवाद ।
    घुघूती बासूती

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