यह प्लेलिस्ट खासकर अपने अनिवासी मित्रों के लिए । हांलाकि आज-कल कई फिल्में तो पहले विदेशों में रिलीज की जा रही हैं । यह गीत मुझे कर्णप्रिय लगते हैं और नये भी हैं ।
आगाज़
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी , नौजवानों की जिस जमात से आपात-काल के खत्म होते होते जुड़ा उसने 'सांस्कृतिक क्रान्ति' का महत्व समझा । भवानी बाबू ने इस जमात को कहा ' सुरा-बेसुरा ' जैसा भी हो गाओ। सो , सुरे-बेसुरे गीतों का यह चिट्ठा ।
Tuesday 13 December 2011
Sunday 4 December 2011
देव आनन्द : दिल अभी भरा नहीं
फेसबुक-युग में देव आनन्द का न रहना । कुछ मित्रों ने उन्हें उन्हींकी फिल्मों के गीतों को याद कर श्रद्धांजलि दी है। 'तेरी दुनिया में जीने से,बेहतर है कि मर जाएं'से शुरु कर ,'बादल,बिजली,चंदन,पानी जैसा अपना प्यार,लेना होगा जनम हमें कई-कई बार' से होते हुए 'बहुत दूर मुझे चले जाना है' तक।
बड़ी बहन की लेडीज साइकिल और घर से इजाजत लेकर जिन फिल्मों को अकेले देखा था उनमें प्रमुख थी 'हम दोनों'। फिल्म देखने के बाद के दिनों में एक पुराना ओवरकोट और दो हॉकी-स्टिक लेकर जब एक पांव से चलता था तब बा नाराज हो जाती थी ।
'७४ का आन्दोलन शुरु हुआ तब चर्चा सुनी कि '४२ के दिनों में देव आनन्द 'ऑगस्ट-क्रांति के नायक' जयप्रकाश से मिले थे। आपातकाल में सभी मौलिक अधिकारों के निलम्बित रहने के बाद जब आम चुनाव हुए तब देव आनन्द वरिष्टतम अभिनेता थे जिन्होंने खुलकर कांग्रेस को हराने की अपील की।
फिर बड़े भाई नचिकेता द्वारा बाथरूम के अन्दर (ईको-एफेक्ट के लिए) माउथ ऑर्गन पर 'दूरियां नजदीकियां बन गईं' बजाना, उनके मित्र सुधीर चक्रवर्ती का दो प्लास्टिक की बाल्टियां उलट कर 'बोंगो' का विकल्प बनाना-यह दौर आया। सुधीरदा तो फौज के अधिकारी बन कर चले गये। १९७७ में कोलकाता इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट के यू-ब्लॉक के साथी और सीनियर चन्द्रशेखर शेवडे को जबरदस्त बोंगों बजाते सुना।
देव आनन्द की स्मृति में एक आशु-प्लेलिस्ट प्रस्तुत है :
बड़ी बहन की लेडीज साइकिल और घर से इजाजत लेकर जिन फिल्मों को अकेले देखा था उनमें प्रमुख थी 'हम दोनों'। फिल्म देखने के बाद के दिनों में एक पुराना ओवरकोट और दो हॉकी-स्टिक लेकर जब एक पांव से चलता था तब बा नाराज हो जाती थी ।
'७४ का आन्दोलन शुरु हुआ तब चर्चा सुनी कि '४२ के दिनों में देव आनन्द 'ऑगस्ट-क्रांति के नायक' जयप्रकाश से मिले थे। आपातकाल में सभी मौलिक अधिकारों के निलम्बित रहने के बाद जब आम चुनाव हुए तब देव आनन्द वरिष्टतम अभिनेता थे जिन्होंने खुलकर कांग्रेस को हराने की अपील की।
फिर बड़े भाई नचिकेता द्वारा बाथरूम के अन्दर (ईको-एफेक्ट के लिए) माउथ ऑर्गन पर 'दूरियां नजदीकियां बन गईं' बजाना, उनके मित्र सुधीर चक्रवर्ती का दो प्लास्टिक की बाल्टियां उलट कर 'बोंगो' का विकल्प बनाना-यह दौर आया। सुधीरदा तो फौज के अधिकारी बन कर चले गये। १९७७ में कोलकाता इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट के यू-ब्लॉक के साथी और सीनियर चन्द्रशेखर शेवडे को जबरदस्त बोंगों बजाते सुना।
देव आनन्द की स्मृति में एक आशु-प्लेलिस्ट प्रस्तुत है :
Friday 2 December 2011
सुमन कल्याणपुर की मेरी प्लेलिस्ट
सुमन कल्याणपुर चर्चा की हकदार हैं। वे उन गायिकाओं में प्रमुख हैं जिनके साथ भारत-रत्न ने राजनीति और तिकड़म की। होश संभालने के बाद मेरे मन पर छाप छोड़ गए तथा उनसे लगायत तरुणाई की दहलीज पर ये गीत मैंने सुने। पसंद किए होंगे इसलिए याद भी रह गये। आपको कैसे लगे ?
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सुमन कल्याणपुर
Tuesday 15 November 2011
रस के भरे तोरे नैन , आपकी याद आती रही रात भर
यह दो गीत मैंने काफी पहले पोस्ट किए थे । मित्रूं ने पसन्द भी किए थे । कल उस पोस्ट की लिंक फिर से दी तो पता चला कि इनमें से एक यूट्यूब ने हटा लिया है। सुबह से क्रोम में शॉकवेव का प्लग - इन क्रैश कर गया है । अब प्रयास कर रहा हूं कि उन दो गीतों को नये सिरे से पोस्ट करूं। मित्र इन्द्रनाथ मोदक ने ध्यान दिलाया कि मूल पोस्ट में यूट्यूब इसे हटा चुका है। मित्र का आभारी हूं कि उन्होंने इस पोस्ट की हत्या की खबर दी।
छाया गांगुली द्वारा गाये गमन फिल्म के इस गीत को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। धुन जयदेव की है ।
हीरादेवी मिश्रा का गाया गीत 'आलाप' का है तथा इसका संगीत भी जयदेव का है ।
Wednesday 29 June 2011
चार भाषाओं में क्रांति गीत /समाजवादी जनपरिषद , जलपाईगुड़ी - राष्ट्रीय परिषद
इन गीतों की झलकियां मैं अपने नन्हे से कैमेरा में कैद कर सका । अवसर था समाजवादी जनपरिषद की उत्तर बंग के जलपाईगुड़ी में हुई राष्ट्रीय परिषद । उम्मीद है पसन्द करेंगे और टिप्पणी भी करेंगे ।
सम्बलपुरी समूह गीत
बांग्ला लोक शैली ’बाऊल’ पर आधारित राजनैतिक गीत / राधाकान्त बहिदार
एडवोकेट जेमन का गाया मलयालम गीत
महात्मा फुले रचित अभंग - स्त्री पुरुष सर्व / स्वर संजीव साने
नोट : यू ट्यूब पर लगातार दूसरी बार सुनने पर बिना बाधा सुना जा सकता है। पहली बार में ’बफ़रिंग’ चल रही होती है इसलिए अटक - अटक कर बजता है ।
सम्बलपुरी समूह गीत
बांग्ला लोक शैली ’बाऊल’ पर आधारित राजनैतिक गीत / राधाकान्त बहिदार
एडवोकेट जेमन का गाया मलयालम गीत
महात्मा फुले रचित अभंग - स्त्री पुरुष सर्व / स्वर संजीव साने
नोट : यू ट्यूब पर लगातार दूसरी बार सुनने पर बिना बाधा सुना जा सकता है। पहली बार में ’बफ़रिंग’ चल रही होती है इसलिए अटक - अटक कर बजता है ।
Monday 2 May 2011
Wednesday 23 March 2011
लोहिया जन्मशताब्दी पर गीत : इसलिए राह संघर्ष की हम चुनें, गीत : अनूप वशिष्ट
लोहिया जन्मशताब्दी पर अनूप वशिष्ट का गीत : इसलिए राह संघर्ष की हम चुनें । बेस्वर : मेरा
Saturday 11 September 2010
Friday 3 September 2010
गीत - पहेली उर्फ़ बुझौव्वल (२) के मजेदार उत्तर और परिणाम
गीत - पहेली के गीतों और कविता से जब मैं रू-ब-रू हुआ तब मेरी स्थिति पूरी तरह सुनील दीपक-सी थी । इन्टरनेट पर पहेली देना कितना कठिन है यह भी तो सोचिए ! यह सही है कि परीक्षा प्रणाली में नरमी लाना हमेशा सुधार की दिशा में उठाया कदम होता है । खुली किताब वाले टेस्ट इसी लिहाज से परीक्षा - सुधारों में गिने जाते थे । स्पर्धा में भाग लेने वाले लगभग सभी गूगल बाबा की शरण में गये होंगे - सिवाय नीरज रोहिल्ला ,सुनील दीपक और लावाण्याजी के - यह मेरा अनुमान है !
बहरहाल ,तीसरे सवाल का जवाब सभी उत्तर देने वालों ने सही दिया है ! मुसाफ़िर फिल्म के लिए लता मंगेशकर के साथ यह मधुर आवाज दिलीप कुमार की है ।
दूसरे , सवाल का जवाब है : ’दिल की रानी ’ (१९४७) फिल्म का यह गीत राज कपूर ने गाया है । इसका सही उत्तर इन्दु पुरी , अशोक भार्गव , विनय जैन , किशोर ’किश ’सम्पत , पवन झा ने सही दिया है ।
पहले सवाल का उत्तर दो लोगों ने सही दिया है । मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया कबीर का यह भजन तेलुगु फिल्म भक्त रामदासु से लिया गया है । इस फिल्म में कबीर की भूमिका के लिए रफ़ी ने आवाज दी थी और तीन हिन्दी भजन गाये थे। फिल्म का संगीत निर्देशन वी. नागैय्या का था । अशोक भार्गव और पवन झा ने सही जवाब दिया है ।
चौथे गीत के साथ दो प्रश्न जुड़े थे । काव्य पाठ करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति की आवाज पहचाननी थी तथा फिल्म का नाम भी बताना था। पहले हिस्से का जवाब किसी ने सही नहीं दिया है । विश्व दीपक ने मेरी एक भूल की और इशारा किया है | इसके रचयिता साहिर लुधियानवी नहीं कैफ़ी आज़मी हैं |यह कविता इस्मत चुग़तई की लिखी और बनाई फिल्म ’सोने की चिड़ि्या ’ से है । तलत महमूद और नूतन के अलावा इसमें बलराज साहनी ने अभिनय किया था । यह काव्य पाठ बलराज साहनी का है । इस प्रश्न का आधा जवाब पवन झा ने सही दिया है ।
सभी उत्तर प्रकाशित कर दिए जा रहे हैं । परिणाम इस प्रकार है :
प्रथम : पवन झा (साढ़े तीन अंक )
द्वितीय : अशोक भार्गव (तीन अंक )
तृतीय : विनय जैन , किशोर ’किश’ सम्पत , इन्दु पुरी (दो अंक)
चतुर्थ : नीरज रोहिल्ला ,संजय पटेल , लावण्या (एक अंक)
पंचम : सुनील दीपक (आधा अंक ,ईमानदारी का)
बहरहाल ,तीसरे सवाल का जवाब सभी उत्तर देने वालों ने सही दिया है ! मुसाफ़िर फिल्म के लिए लता मंगेशकर के साथ यह मधुर आवाज दिलीप कुमार की है ।
दूसरे , सवाल का जवाब है : ’दिल की रानी ’ (१९४७) फिल्म का यह गीत राज कपूर ने गाया है । इसका सही उत्तर इन्दु पुरी , अशोक भार्गव , विनय जैन , किशोर ’किश ’सम्पत , पवन झा ने सही दिया है ।
पहले सवाल का उत्तर दो लोगों ने सही दिया है । मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया कबीर का यह भजन तेलुगु फिल्म भक्त रामदासु से लिया गया है । इस फिल्म में कबीर की भूमिका के लिए रफ़ी ने आवाज दी थी और तीन हिन्दी भजन गाये थे। फिल्म का संगीत निर्देशन वी. नागैय्या का था । अशोक भार्गव और पवन झा ने सही जवाब दिया है ।
चौथे गीत के साथ दो प्रश्न जुड़े थे । काव्य पाठ करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति की आवाज पहचाननी थी तथा फिल्म का नाम भी बताना था। पहले हिस्से का जवाब किसी ने सही नहीं दिया है । विश्व दीपक ने मेरी एक भूल की और इशारा किया है | इसके रचयिता साहिर लुधियानवी नहीं कैफ़ी आज़मी हैं |यह कविता इस्मत चुग़तई की लिखी और बनाई फिल्म ’सोने की चिड़ि्या ’ से है । तलत महमूद और नूतन के अलावा इसमें बलराज साहनी ने अभिनय किया था । यह काव्य पाठ बलराज साहनी का है । इस प्रश्न का आधा जवाब पवन झा ने सही दिया है ।
सभी उत्तर प्रकाशित कर दिए जा रहे हैं । परिणाम इस प्रकार है :
प्रथम : पवन झा (साढ़े तीन अंक )
द्वितीय : अशोक भार्गव (तीन अंक )
तृतीय : विनय जैन , किशोर ’किश’ सम्पत , इन्दु पुरी (दो अंक)
चतुर्थ : नीरज रोहिल्ला ,संजय पटेल , लावण्या (एक अंक)
पंचम : सुनील दीपक (आधा अंक ,ईमानदारी का)
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Wednesday 1 September 2010
जन्माष्टमी पर तीन भजन / सहगल / सुब्बलक्ष्मी : सूरदास / मीराबाई
जन्माष्टमी के अवसर पर अपनी पसन्द के यह तीन भजन प्रस्तुत हैं :
Sunday 29 August 2010
कुछ कम सरल फिल्मी-गीत- पहेली उर्फ़ बुझौव्वल (२)
मई २००७ में विविध भारती के श्रोताओं के लिए गीतों से सम्बन्धित एक पहेली मैंने शैशव पर पेश की थी । पाठक-श्रोताओं ने बहुत चाव से भाग लिया था ।
पिछले साल एक संगीत प्रेमी वरिष्ट ब्लॉगर ने मुझे एक खजाना भेंट दिया - कई हजार फिल्मी गानों की डीवीडी का । सभी गीत सुन भी नहीं पाया हूँ । मशीन पर इधर से उधर करते हुए चार गीत छाँटे हैं , बुझौव्वल में शामिल करने लायक ।
बुझौव्वल में भाग लेने वाले श्रोता अपने उत्तर इस पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में जमा करें । परिणाम के साथ टिप्प्णियां भी प्रकाशित कर दी जायेंगी । प्रश्नों के उत्तर से अलग टिप्पणियां जल्दी अनुमोदित होंगी ।
पहला गीत
प्रश्न १.
मोहम्मद रफ़ी के गाए इस भजन को किस फिल्म से लिया गया है ?
दूसरा गीत
दूसरा प्रश्न
यशोदानंदन जोशी द्वारा लिखा गया यह गीत सचिन देव बर्मन द्वारा सुरों में संजोया गया है । आपको गायक का नाम बताना है,जो एक प्रसिद्ध नाम है ।
तीसरा गीत
प्रश्न ३
लता मंगेशकर के साथ इस दोगाने में किस प्रसिद्ध व्यक्ति की आवाज है ?
चौथा गीत
प्रश्न४
प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी की इस रचना का पाठ एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने फिल्म में किया है । आपको उस व्यक्ति और फिल्म का नाम बताना है ।
आपके उत्तर ३ सितम्बर तक लिए जाएंगे । अन्य टिप्पणियां सदैव ग्राह्य हैं ।
विविध भारती से जुड़े लोग इस बुझौव्वल पर ताना कस सकते हैं , प्रश्नों पर टिप्पणी कर सकते हैं , उत्तर नहीं । यह बात खजाना देने वाले वरिष्ट ब्लॉगर मित्र पर भी लागू है ।
पिछले साल एक संगीत प्रेमी वरिष्ट ब्लॉगर ने मुझे एक खजाना भेंट दिया - कई हजार फिल्मी गानों की डीवीडी का । सभी गीत सुन भी नहीं पाया हूँ । मशीन पर इधर से उधर करते हुए चार गीत छाँटे हैं , बुझौव्वल में शामिल करने लायक ।
बुझौव्वल में भाग लेने वाले श्रोता अपने उत्तर इस पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में जमा करें । परिणाम के साथ टिप्प्णियां भी प्रकाशित कर दी जायेंगी । प्रश्नों के उत्तर से अलग टिप्पणियां जल्दी अनुमोदित होंगी ।
पहला गीत
प्रश्न १.
मोहम्मद रफ़ी के गाए इस भजन को किस फिल्म से लिया गया है ?
दूसरा गीत
दूसरा प्रश्न
यशोदानंदन जोशी द्वारा लिखा गया यह गीत सचिन देव बर्मन द्वारा सुरों में संजोया गया है । आपको गायक का नाम बताना है,जो एक प्रसिद्ध नाम है ।
तीसरा गीत
प्रश्न ३
लता मंगेशकर के साथ इस दोगाने में किस प्रसिद्ध व्यक्ति की आवाज है ?
चौथा गीत
प्रश्न४
प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी की इस रचना का पाठ एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने फिल्म में किया है । आपको उस व्यक्ति और फिल्म का नाम बताना है ।
आपके उत्तर ३ सितम्बर तक लिए जाएंगे । अन्य टिप्पणियां सदैव ग्राह्य हैं ।
विविध भारती से जुड़े लोग इस बुझौव्वल पर ताना कस सकते हैं , प्रश्नों पर टिप्पणी कर सकते हैं , उत्तर नहीं । यह बात खजाना देने वाले वरिष्ट ब्लॉगर मित्र पर भी लागू है ।
Friday 27 August 2010
मुकेश की याद साथी युनुस ख़ान के साथ
ऐ दिल-ए-आवारा चल , गीत - मजरूह , संगीत सचिन देव बर्मन ,फिल्म- डॉ. विद्या
http://www.hummaa.com/music/album/23980/Dr.%20Vidya
सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं,संगीत-सलिल चौधरी ,फिल्म - मधुमती
मेरे ख़्वाबों में ख़्यालों में , फिल्म - हनीमून , गीत - शैलेन्द्र , संगीत - सलिल चौधरी
ज़िन्दगी ख़्वाब है,गीत - शैलेन्द्र ,संगीत - सलिल चौधरी ,फिल्म - जागते रहो
कई बार यूँ ही देखा है ,गीत - योगेश , संगीत - सलिल चौधरी , फिल्म - रजनीगंधा
आज मुकेश की पुण्य तिथि के मौके पर विविध भारती दिन भर उन पर केन्द्रित कार्यक्रम पेश कर रही है । सुबह ’भूले-बिसरे गीत’ में युनुस ख़ान ने आठ दिलकश गीत सुनवाए अपनी दिलकश आवाज में उद्घोषणा के साथ । इन्हें सुन कर आनन्द-अश्रु बहे । उनमें से कुछ गीत यहाँ प्रस्तुत हैं । सिर्फ़ आखिरी गीत सुबह के कार्यक्रम में नहीं था । गीतकार योगेश के प्रति युनुस भी आदर-भाव रखते हैं इसलिए दिन में कभी न कभी यह गीत भी प्रसारित हो जाएगा , यक़ीन है ।
आज सुबह और रात्रि ९.३० पर एक ही कलाकार में मुकेश होंगे , शाम चार बजे ’सरगम के सितारे’ मुकेश पर केन्द्रित होगा तथा शाम ७.०० बजे विशेष जयमाला में संगीतकार नौशाद द्वारा मुकेश पर केन्द्रित विशेष जयमाला का पुनर्प्रसारण होगा ।
दिल्ली जैसे शहर में आकाशवाणी का एफ़एम गोल्ड है परन्तु एफ़एम पर विविध भारती नहीं है ! मानो निजी एफ़एम चैनलों पर कृपा कर के ।
एक बार इस चिट्ठे पर विविध भारती की ’त्रिवेणी’ से प्रेरित तीन गीत लगाये थे तब युनुस भाई ने कहा था कभी उद्घोषणा के साथ नेट पर पूरा कार्यक्रम पेश होना चाहिए। इस सुझाव पर अमल की औकात हमारी नहीं है ।
http://www.hummaa.com/music/album/23980/Dr.%20Vidya
सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं,संगीत-सलिल चौधरी ,फिल्म - मधुमती
मेरे ख़्वाबों में ख़्यालों में , फिल्म - हनीमून , गीत - शैलेन्द्र , संगीत - सलिल चौधरी
ज़िन्दगी ख़्वाब है,गीत - शैलेन्द्र ,संगीत - सलिल चौधरी ,फिल्म - जागते रहो
कई बार यूँ ही देखा है ,गीत - योगेश , संगीत - सलिल चौधरी , फिल्म - रजनीगंधा
आज मुकेश की पुण्य तिथि के मौके पर विविध भारती दिन भर उन पर केन्द्रित कार्यक्रम पेश कर रही है । सुबह ’भूले-बिसरे गीत’ में युनुस ख़ान ने आठ दिलकश गीत सुनवाए अपनी दिलकश आवाज में उद्घोषणा के साथ । इन्हें सुन कर आनन्द-अश्रु बहे । उनमें से कुछ गीत यहाँ प्रस्तुत हैं । सिर्फ़ आखिरी गीत सुबह के कार्यक्रम में नहीं था । गीतकार योगेश के प्रति युनुस भी आदर-भाव रखते हैं इसलिए दिन में कभी न कभी यह गीत भी प्रसारित हो जाएगा , यक़ीन है ।
आज सुबह और रात्रि ९.३० पर एक ही कलाकार में मुकेश होंगे , शाम चार बजे ’सरगम के सितारे’ मुकेश पर केन्द्रित होगा तथा शाम ७.०० बजे विशेष जयमाला में संगीतकार नौशाद द्वारा मुकेश पर केन्द्रित विशेष जयमाला का पुनर्प्रसारण होगा ।
दिल्ली जैसे शहर में आकाशवाणी का एफ़एम गोल्ड है परन्तु एफ़एम पर विविध भारती नहीं है ! मानो निजी एफ़एम चैनलों पर कृपा कर के ।
एक बार इस चिट्ठे पर विविध भारती की ’त्रिवेणी’ से प्रेरित तीन गीत लगाये थे तब युनुस भाई ने कहा था कभी उद्घोषणा के साथ नेट पर पूरा कार्यक्रम पेश होना चाहिए। इस सुझाव पर अमल की औकात हमारी नहीं है ।
Tuesday 10 August 2010
चार ज्यादा सुने गीत : गमन,घर, दूर का राही, आलाप
आप की याद आती रही रात भर / गमन / गीत : मख़दूम मोहियुद्दीन,स्वर :छाया गांगुली ,संगीत जयदेव
नई री लगन / आलाप/स्वर मधु रानी,फ़ैय्याज,येसुदास ,संगीत जयदेव
बेकरारे दिल,दूर का राही,किशोर कुमार-सुलक्षणा पंडित,
आप की आंखों में कुछ - घर , किशोर-लता ,संगीत-राहुलदेव बर्मन,गीत-गुलज़ार
नई री लगन / आलाप/स्वर मधु रानी,फ़ैय्याज,येसुदास ,संगीत जयदेव
बेकरारे दिल,दूर का राही,किशोर कुमार-सुलक्षणा पंडित,
आप की आंखों में कुछ - घर , किशोर-लता ,संगीत-राहुलदेव बर्मन,गीत-गुलज़ार
Saturday 31 July 2010
छोटे चोर द्वारा ज्यादा सुने गये रफ़ी के गीत
आ जा पंछी अकेला है , रफ़ी-आशा,मजरूह,सचिनदेव बर्मन,नौ दो ग्यारह
दीवाना मस्ताना हुआ दिल, रफ़ी-आशा,मजरूह,बम्बई का बाबू,सचिनदेव बर्मन
मन रे तू काहे न धीर धरे ,चित्रलेखा, रफ़ी,साहिर लुधियानवी,रौशन
दीवाना मस्ताना हुआ दिल, रफ़ी-आशा,मजरूह,बम्बई का बाबू,सचिनदेव बर्मन
मन रे तू काहे न धीर धरे ,चित्रलेखा, रफ़ी,साहिर लुधियानवी,रौशन
Thursday 22 July 2010
छोटे चोर के ज्यादा देखे-सुने पांच विडियो
बीती न बिताई रैना , लता मंगेशकर -भुपेन्द्र , परिचय , राहुलदेव बर्मन,
इन दिनो,लाईफ़ इन अ मेट्रो
मनमोहना बड़े झूठे , लता मंगेशकर
आजा पंछी अकेला है,रफ़ी -आशा
रैना बीती जाए , लता ,अमर प्रेम,
अभी न जाओ छोड़कर - हम दोनों
इन दिनो,लाईफ़ इन अ मेट्रो
मनमोहना बड़े झूठे , लता मंगेशकर
आजा पंछी अकेला है,रफ़ी -आशा
रैना बीती जाए , लता ,अमर प्रेम,
अभी न जाओ छोड़कर - हम दोनों
Wednesday 21 July 2010
Sunday 18 July 2010
छोटे चोर के गीत (२)
मन आनन्द आनन्द छायो - आशा भोंसले तथा सत्यशील देशपांडे, संगीत - अजित वर्मन , शब्द- वसन्त देव,फिल्म- विजेता
बावरा मन देखने चला एक सपना ,फिल्म- हजारों ख्वाहिशें ऐसी, शब्द और स्वर - स्वानन्द किरकिरे
बावरा मन देखने चला एक सपना ,फिल्म- हजारों ख्वाहिशें ऐसी, शब्द और स्वर - स्वानन्द किरकिरे
Friday 16 July 2010
छोटे चोर द्वारा सुने गये गीत
संगीत कम्पनी वायकॉम द्वारा यूट्यूब और गूगल के खिलाफ़ कॉपीराईट उल्लंघन के एक अरब डॉलर के दावे में न्यू यॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालत ने यूट्यूब और गूगल के पक्ष में फैसला दे दिया । अदालत ने कहा कि यह संभव नहीं है यूट्यूब जैसी सेवा देने वाली कम्पनी यह पता करे कि चढ़ाए गये विडियो से कॉपीराईट कानून का उल्लंघन हुआ है। विडियो कम्पनी यदि साबित कर दे कि कॉपीराईट उल्लंघन किया गया है तब उसे हटा लिया जाता है !
हमारी स्थिति भी यूट्यूब जैसी है । किशोरावस्था में बॉबी का छोटा वाला रेकॉर्ड (ई.पी.) बहुत जद्दोजहद के बाद खरीदा था और एस.एल.लोनी की प्लेन ट्रिग्नोमेट्री ,भाग एक के पांचवे अभ्यास का २६वां सवाल बिना किसी की मदद के हल कर लेने पर जीजाजी ने उस्ताद हाफ़िज़ अली खाँ का एक बड़ा रेकॉर्ड पुरस्कार स्वरूप दिया था । डिजिटल जमाने में संगीत या विडियो खरीद कर सुना / देखा नहीं है । अधिकांश इनटरनेट से इकट्ठा किया तथा कुछ डीवीडी भेंट स्वरूप मिल गये । दावा करने पर हटा लेने की शर्त मान कर हम भी संगीत प्रेमियों को इस ब्लॉग के मंच से कुछ पेश कर देते हैं ।
छ: - सात सौ गीतों में से कुछ छाँटना कितना कठिन होगा ! इस तरह की समस्या के लिए संगीत के गहन प्रेमी विनय जैन ने श्रोताओं के बीच ऑनलाईन सर्वेक्षण का तरीका अपनाया है । आज उस सर्वेक्षण की अंतिम तारीख थी ।
विनयजी जितना समर्पण और निष्ठा मुझ में नहीं है । हम ने यह गौर किया कि कम्प्यू्टर और आई-पॉड ने एक हिसाब रखा है - ’सर्वाधिक बजाये गये गीत ’। आज से किश्तों में पेश :
हमारी स्थिति भी यूट्यूब जैसी है । किशोरावस्था में बॉबी का छोटा वाला रेकॉर्ड (ई.पी.) बहुत जद्दोजहद के बाद खरीदा था और एस.एल.लोनी की प्लेन ट्रिग्नोमेट्री ,भाग एक के पांचवे अभ्यास का २६वां सवाल बिना किसी की मदद के हल कर लेने पर जीजाजी ने उस्ताद हाफ़िज़ अली खाँ का एक बड़ा रेकॉर्ड पुरस्कार स्वरूप दिया था । डिजिटल जमाने में संगीत या विडियो खरीद कर सुना / देखा नहीं है । अधिकांश इनटरनेट से इकट्ठा किया तथा कुछ डीवीडी भेंट स्वरूप मिल गये । दावा करने पर हटा लेने की शर्त मान कर हम भी संगीत प्रेमियों को इस ब्लॉग के मंच से कुछ पेश कर देते हैं ।
छ: - सात सौ गीतों में से कुछ छाँटना कितना कठिन होगा ! इस तरह की समस्या के लिए संगीत के गहन प्रेमी विनय जैन ने श्रोताओं के बीच ऑनलाईन सर्वेक्षण का तरीका अपनाया है । आज उस सर्वेक्षण की अंतिम तारीख थी ।
विनयजी जितना समर्पण और निष्ठा मुझ में नहीं है । हम ने यह गौर किया कि कम्प्यू्टर और आई-पॉड ने एक हिसाब रखा है - ’सर्वाधिक बजाये गये गीत ’। आज से किश्तों में पेश :
Sunday 25 April 2010
आसमां पे है खुदा और ज़मीं पे हम/फिर सुबह होगी/मुकेश/साहिर खय्याम
आसमां पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आजकल किसीको वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिए रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहे हैं बम
किसको भेजे वो यहां खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
किसको भेजे वो यहां हाथ थामने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम
जो भी है वो ठीक है जिक्र क्यूं करें
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यूं करें
जब उसे ही ग़म नहीं तो क्यूं हमें हो ग़म
गीत - साहिर लुधियानवी
फिल्म - फिर सुबह होगी (१९५८)
स्वर - मुकेश
संगीत- खैय्याम (शर्माजी )
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आजकल किसीको वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिए रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहे हैं बम
किसको भेजे वो यहां खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
किसको भेजे वो यहां हाथ थामने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम
जो भी है वो ठीक है जिक्र क्यूं करें
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यूं करें
जब उसे ही ग़म नहीं तो क्यूं हमें हो ग़म
गीत - साहिर लुधियानवी
फिल्म - फिर सुबह होगी (१९५८)
स्वर - मुकेश
संगीत- खैय्याम (शर्माजी )
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खय्याम,
फिर सुबह होगी,
मुकेश,
राज कपूर,
साहिर
Saturday 24 April 2010
नया मधुर गीत/दिल क्यूं ये मेरा शोर करे / केके/काईट्स/ नसीर फ़रज़/राजेश रोशन/
| K.K - Dil Kyun Yeh Mera - DesiHit.Net .mp3 | ||
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दिल क्यूँ ये मेरा शोर करे
इधर नहीं उधर नहीं
तेरी ओर चले
जरा देर में
ये क्या हो गया
नज़र मिलते ही
कहाँ खो गया
भीड़ में लोगों की वो है वहाँ
और प्यार के मेले में अकेला कितना हूं मैं यहाँ
शुरु हो गई कहानी मेरी
मेरे दिल ने बात ना मानी मेरी
हद से भी आगे ये गुजर ही गया
खुद भी परेशां हुआ
और मुझको भी ये कर गया
**************************************
स्वर - केके
फिल्म - काईट्स
गीतकार नसीर फ़राज़
संगीत - राकेश रौशन
Friday 16 April 2010
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या/ बेग़म अख़्तर/ख़्वाजा हैदर अली ’आतिश’
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
केहती है तुझको खल्क़-ए-खुदा ग़ाएबाना क्या
ज़ीना सबा का ढूँढती है अपनी मुश्त-ए-ख़ाक
बाम-ए-बलन्द यार का है आस्ताना क्या
ज़ेरे ज़मीं से आता है गुल हर सू ज़र-ए-बकफ़
क़ारूँ ने रास्ते में लुटाया खज़ाना क्या
चारों तरफ़ से सूरत-ए-जानाँ हो जलवागर
दिल साफ़ हो तेरा तो है आईना खाना क्या
तिब्ल-ओ-अलम न पास है अपने न मुल्क-ओ-माल
हम से खिलाफ़ हो के करेगा ज़माना क्या
आती है किस तरह मेरी क़ब्ज़-ए-रूह को
देखूँ तो मौत ढूँढ रही है बहाना क्या
तिरछी निगह से ताइर-ए-दिल हो चुका शिकार
जब तीर कज पड़ेगा उड़ेगा निशाना क्या?
बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-अज़ीम
महमाँ साराय-ए-जिस्म का होगा रवना क्या
यूँ मुद्दई हसद से न दे दाद तू न दे
आतिश ग़ज़ल ये तूने कही आशिक़ाना क्या?
-ख़्वाजा हैदर अली ’आतिश ’
केहती है तुझको खल्क़-ए-खुदा ग़ाएबाना क्या
ज़ीना सबा का ढूँढती है अपनी मुश्त-ए-ख़ाक
बाम-ए-बलन्द यार का है आस्ताना क्या
ज़ेरे ज़मीं से आता है गुल हर सू ज़र-ए-बकफ़
क़ारूँ ने रास्ते में लुटाया खज़ाना क्या
चारों तरफ़ से सूरत-ए-जानाँ हो जलवागर
दिल साफ़ हो तेरा तो है आईना खाना क्या
तिब्ल-ओ-अलम न पास है अपने न मुल्क-ओ-माल
हम से खिलाफ़ हो के करेगा ज़माना क्या
आती है किस तरह मेरी क़ब्ज़-ए-रूह को
देखूँ तो मौत ढूँढ रही है बहाना क्या
तिरछी निगह से ताइर-ए-दिल हो चुका शिकार
जब तीर कज पड़ेगा उड़ेगा निशाना क्या?
बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-अज़ीम
महमाँ साराय-ए-जिस्म का होगा रवना क्या
यूँ मुद्दई हसद से न दे दाद तू न दे
आतिश ग़ज़ल ये तूने कही आशिक़ाना क्या?
-ख़्वाजा हैदर अली ’आतिश ’
Monday 5 April 2010
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए/मन्ना डे/बादल/
खुदगर्ज़ दुनिया में ये,इंसान की पहचान है
जो पराई आग में जल जाये,वो इंसान है
अपने लिए जीए तो क्या जीए - २
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए
बाज़ार से जमाने के,
कुछ भी न हम खरींदेगे-२
हाँ, बेचकर खुशी अपनी औरों के गम खरीदेंगे
बुझते दिए जलाने के लिए-२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..
अपनी ख़ुदी को जो समझा,उसने ख़ुदा को पहचाना
आज़ाद फ़ितरतें इंसां, अंदाज़ क्या भला माना
सर ये नहीं झुकाने के लिए -२
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए..
हिम्मत बुलन्द है अपनी , पत्थर सी जान रखते हैं
कदमों तले ज़मीं तो क्या,
हम आसमान रख़ते हैं .
गिरते हुओं को उठाने के लिए
तू जी ऐ दिल,ज़माने के लिए
अपने लिए....
चल आफ़ताब लेकर चल,चल माहताब लेकर चल-२
तू अपनी एक ठोकर में सौ इंकलाब लेकर चल
जुल्म-ओ-सितम मिटाने के लिए
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
अपने लिए....
- जावेद अख़्तर नहीं जावेद अनवर
संगीतकार उषा खन्ना
Friday 19 March 2010
तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत पर यकीन कर
आज एक OTC प्रशिक्षित स्वयंसेवक के ब्लॉग पर इस गीत का टिकर देख कर मजा आया । आप भी सुनें :
पूरा गीत स्वयंसेवक आत्मसात करें तो कितना भला हो !
पूरा गीत स्वयंसेवक आत्मसात करें तो कितना भला हो !
Saturday 23 January 2010
नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव
'वसंतोत्सव’ पर इस पोस्ट के साथ कविता का पाठ लगाना था । वर्डप्रेस में संभव नहीं हुआ । इसलिए यहाँ :
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Monday 18 January 2010
मार्टिन लूथर किंग के जनम दिन पर
अमेरिका में चले नागरिक - अधिकार आन्दोलन के नेता माटिन लूथर किंग महात्मा गांधी से प्रभावित थे । उनका जनम दिन १५ जनवरी को पड़ता है लेकिन अमेरिकी जनता इसे हमेशा निकट के सोमवार को मनाती है । गत शुक्रवार को वे ८१ वर्ष के होते। उनकी हत्या ४ अप्रैल १९६८ को हुई ।
आज उनके अभियान से जुड़े़ तीन गीतों के विडियो तथा ट्विटर पर आ रही उनकी हजारों सूक्तियों में से कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
इस गीत में रंगभेद को एक हौसले और साथ ही व्यंग्य के साथ चुनौती दी गयी है । गायक पीट सीगर हैं ।
अश्वेत प्रार्थना ’ वी शाल ओवरकम ’ न सिर्फ़ नागरिक अधिकार आन्दोलन का मुख्य गीत बना अपितु अन्य देशों , अन्य भाषाओं में भी जन आन्दोलन में बतौर आवाहन गीत ( हम होंगे कामयाब ) लोकप्रिय हुआ :
पीट सीगर की तरह जोन बाएज़ भी नागरिक अधिकार तथा शान्ति आन्दोलन की प्रमुख हस्ती रही हैं और गायिका भी । उनके स्वर में :
ट्विटर पर आ रहे हजारों सन्देशों और सूक्तियों में से कुछ :
वे एक खाँटी नेता थे जो सर्व सम्मति की तलाश नहीं करता था उसका निर्माण करता था ।
’सही काम करने के लिए हर वक्त सही होता है ।
’”किसी मक़सद के लिए न मरने वाला व्यक्ति जीने के लायक नहीं । ’
मेरे तथा मेरे जैसे तमाम अफ़्रीकी-अमेरिकनों के लिए जहां हम पहुंचे हैं उसका मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें प्रणाम ।
’ यह न भूलना कि हिटलर ने जर्मनी में को भी किया एक आईन के तहत किया । ’
’ जीवन का सबसे जरूरी सवाल ,"तुम दूसरों के लिए क्या कर रहे हो ’
’ प्रेम वह एकमेव ताकत है जो दुश्मन को दोस्त में बदल दे ’
’ शान्ति सिर्फ़ एक दूरस्थ लक्ष्य नहीं , उसे हासिल करने का साधन भी है ’
’ चुपचाप जुल्म को कबूल लेने वाला उससे कम दोषी नहीं जो जुल्म का षड़यन्त्र रचता है ’
’ अंधेरा अंधेरे को भगा नहीं सकता,सिर्फ़ प्रकाश भगा सकता है । नफ़रत नफ़रत को खत्म नहीं कर सकती सिर्फ़ प्रेम कर सकता है । ’
’जिन्दगी में महत्व रखने वाले मुद्दों पर जिस दिन हम चुप्पी साधना शुरु करते हैं ,उस दिन जिन्दगी के अन्त की शुरुआत हो जाती है ’
तीन सम्बन्धित पोस्ट :
तीन बागी गायक
अशोक पाण्डे को समर्पित जोन बाएज़ पर पोस्ट
गाना माने प्यार करना , हाँ कहना ,उड़ना और ऊँचे उड़ना
आज उनके अभियान से जुड़े़ तीन गीतों के विडियो तथा ट्विटर पर आ रही उनकी हजारों सूक्तियों में से कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
इस गीत में रंगभेद को एक हौसले और साथ ही व्यंग्य के साथ चुनौती दी गयी है । गायक पीट सीगर हैं ।
अश्वेत प्रार्थना ’ वी शाल ओवरकम ’ न सिर्फ़ नागरिक अधिकार आन्दोलन का मुख्य गीत बना अपितु अन्य देशों , अन्य भाषाओं में भी जन आन्दोलन में बतौर आवाहन गीत ( हम होंगे कामयाब ) लोकप्रिय हुआ :
पीट सीगर की तरह जोन बाएज़ भी नागरिक अधिकार तथा शान्ति आन्दोलन की प्रमुख हस्ती रही हैं और गायिका भी । उनके स्वर में :
ट्विटर पर आ रहे हजारों सन्देशों और सूक्तियों में से कुछ :
वे एक खाँटी नेता थे जो सर्व सम्मति की तलाश नहीं करता था उसका निर्माण करता था ।
’सही काम करने के लिए हर वक्त सही होता है ।
’”किसी मक़सद के लिए न मरने वाला व्यक्ति जीने के लायक नहीं । ’
मेरे तथा मेरे जैसे तमाम अफ़्रीकी-अमेरिकनों के लिए जहां हम पहुंचे हैं उसका मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें प्रणाम ।
’ यह न भूलना कि हिटलर ने जर्मनी में को भी किया एक आईन के तहत किया । ’
’ जीवन का सबसे जरूरी सवाल ,"तुम दूसरों के लिए क्या कर रहे हो ’
’ प्रेम वह एकमेव ताकत है जो दुश्मन को दोस्त में बदल दे ’
’ शान्ति सिर्फ़ एक दूरस्थ लक्ष्य नहीं , उसे हासिल करने का साधन भी है ’
’ चुपचाप जुल्म को कबूल लेने वाला उससे कम दोषी नहीं जो जुल्म का षड़यन्त्र रचता है ’
’ अंधेरा अंधेरे को भगा नहीं सकता,सिर्फ़ प्रकाश भगा सकता है । नफ़रत नफ़रत को खत्म नहीं कर सकती सिर्फ़ प्रेम कर सकता है । ’
’जिन्दगी में महत्व रखने वाले मुद्दों पर जिस दिन हम चुप्पी साधना शुरु करते हैं ,उस दिन जिन्दगी के अन्त की शुरुआत हो जाती है ’
तीन सम्बन्धित पोस्ट :
तीन बागी गायक
अशोक पाण्डे को समर्पित जोन बाएज़ पर पोस्ट
गाना माने प्यार करना , हाँ कहना ,उड़ना और ऊँचे उड़ना
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Sunday 3 January 2010
उम्र कब की बरस के सुफ़ेद हो गई,काली बदरी जवानी की छँटती नहीं !
गुलजार के शब्द ,विशाल भारद्वाज का संगीत , राहत फ़तह अली की आवाज और फिल्म इश्किया का यह गीत
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Sunday 27 December 2009
भारतीय रॉक सितारा अशीम चक्रवर्ती नहीं रहे
पता नहीं मैं रॉक संगीत समझता था या नहीं । कितना सुना था इसका भी अन्दाज न था । भारत में इण्डियन ओशन जैसे बैण्ड तथा पाकिस्तान के कुछ बैण्ड्स के आने के बाद मेरे जैसों के लिए इस विधा के दरवाजे खुले । बहुत कुछ कर्णप्रिय लगा , समझ में भी आया और स्पन्दित कर गया । इस विप्लवी-से संगीत से मेरी घनिष्टता और परिचय अगली पीढ़ी के कारण हुआ ।
भारतीय रॉक प्रेमियों के लिए २५ दिसम्बर , २००९ का दिन दु:खद रहा । ’इण्डियन ओशन’ नामक बैण्ड के प्रमुख और पुराने सदस्य अशीम चक्रवर्ती की ५२ साल की अवस्था में हृदय आघात से मृत्यु हो गयी । अशीम इस फ़्यूजन रॉक बैण्ड के संस्थापक सदस्यों में थे । उनकी नीचे के सप्तक और ऊपर के सप्तक के बीच का विस्तार असीम था । उन्होंने विज्ञापन का काम छोड़कर यह बैण्ड बनाया ।
मैं जिन गीतों से प्रभावित हुआ हूँ , उन्हें यहाँ पेश कर रहा हूँ । दोनों गीतों के बोलों को सुन कर काफ़ी सूफ़ी / निर्गुण सा लगता है । अपनी राय दीजिएगा । अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में उनका गीत लिया था (बन्दे-यह गीत पेश है) । दूसरा गीत गुलाल से है,अशीम के साथ राहुल राम का स्वर है ।
भारतीय रॉक प्रेमियों के लिए २५ दिसम्बर , २००९ का दिन दु:खद रहा । ’इण्डियन ओशन’ नामक बैण्ड के प्रमुख और पुराने सदस्य अशीम चक्रवर्ती की ५२ साल की अवस्था में हृदय आघात से मृत्यु हो गयी । अशीम इस फ़्यूजन रॉक बैण्ड के संस्थापक सदस्यों में थे । उनकी नीचे के सप्तक और ऊपर के सप्तक के बीच का विस्तार असीम था । उन्होंने विज्ञापन का काम छोड़कर यह बैण्ड बनाया ।
मैं जिन गीतों से प्रभावित हुआ हूँ , उन्हें यहाँ पेश कर रहा हूँ । दोनों गीतों के बोलों को सुन कर काफ़ी सूफ़ी / निर्गुण सा लगता है । अपनी राय दीजिएगा । अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में उनका गीत लिया था (बन्दे-यह गीत पेश है) । दूसरा गीत गुलाल से है,अशीम के साथ राहुल राम का स्वर है ।
Saturday 19 December 2009
पूर्व बांग्ला की लोक धुन भटियाली , सितार, फिल्म संगीत पर
भटियाली वे बांग्ला नौकागीत हैं जो भाटा के दौरान नाविक गाया करते हैं , नदी की बहने की स्वाभाविक दिशा में । भटियाली - धुन इतनी मधुर और लोकप्रिय है की गीतों के अलावा प्रख्यात वादकों ने इन्हें सितार ,सरोद और बाँसुरी पर बजाया है । भटियाली में रवीन्द्र संगीत भी है । अन्य भारतीय भाषाओं में भी भटियाली धुनें अपनाई गई हैं । यहाँ भटियाली की दो धुनों पर दो हिन्दी फिल्मी गीत,सितार पर उस्ताद विलायत खान की बजाई एक धुन तथा रुना लैला का गाया एक बांग्ला लोक गीत है । गौर कीजिएगा धुनें दो हैं,दोनों भटियाली ।
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली
नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा
आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला
गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का ऐए मेरे प्यारे वतन लिखा है)
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली
नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा
आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला
गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का ऐए मेरे प्यारे वतन लिखा है)
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रूना लैला
Friday 27 November 2009
मालूम क्या किसीको, दर्दे – निहाँ हमारा / अल्लामा इक़बाल
सारे जहाँसे अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ।
हम बुलबुलें हैं उसकी , वह बोस्ताँ हमारा ॥ध्रु.॥
गुरबतमे हों अगर हम , रहता है दिल वतनमें ।
समझो वहीं हमें भी , दिल हो जहाँ हमारा ॥१॥
परबत वह सबसे ऊँचा , हमसाया आसमाँका ।
वह संतरी हमारा , वह पासबाँ हमारा ॥२॥
गोदीमें खेलती हैं , जिसकी हजारों नदियाँ ।
गुलशन है जिनके दम से , रश्के-जिनाँ हमारा ॥३॥
ए आबे-रूदे-गंगा , वह दिन है याद तुझको ।
उतरा तेरे किनारे , जब कारवाँ हमारा ॥४॥
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ।
हिन्दी हैं हम , वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ॥५॥
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा , सब मिट गये जहाँ से ।
अब तक मग़र है बाकी , नामोनिशाँ हमारा ॥६॥
कुछ बात है कि हस्ती , मिटती नहीं हमारी ।
सदियों रहा है दुश्मन , दौरे – जमाँ हमारा ।।७॥
इक़बाल कोई महरम , अपना नहीं जहाँमें ।
मालूम क्या किसीको , दर्दे – निहाँ हमारा ॥८॥
- अल्लामा इक़बाल
बोस्ताँ = बाग , गुरबत = विदेश , परदेश
हमसाया = पड़ौसी , पासबाँ = रक्षा करने वाला ,
रश्के-जिनाँ = स्वर्ग को भी डाह हो जिनसे ,
महरम = भेद जानने वाला , दर्दे-निहाँ = छिपी हुई वेदना
सुषमा श्रेष्ठ द्वारा गाया ।
हम बुलबुलें हैं उसकी , वह बोस्ताँ हमारा ॥ध्रु.॥
गुरबतमे हों अगर हम , रहता है दिल वतनमें ।
समझो वहीं हमें भी , दिल हो जहाँ हमारा ॥१॥
परबत वह सबसे ऊँचा , हमसाया आसमाँका ।
वह संतरी हमारा , वह पासबाँ हमारा ॥२॥
गोदीमें खेलती हैं , जिसकी हजारों नदियाँ ।
गुलशन है जिनके दम से , रश्के-जिनाँ हमारा ॥३॥
ए आबे-रूदे-गंगा , वह दिन है याद तुझको ।
उतरा तेरे किनारे , जब कारवाँ हमारा ॥४॥
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ।
हिन्दी हैं हम , वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ॥५॥
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा , सब मिट गये जहाँ से ।
अब तक मग़र है बाकी , नामोनिशाँ हमारा ॥६॥
कुछ बात है कि हस्ती , मिटती नहीं हमारी ।
सदियों रहा है दुश्मन , दौरे – जमाँ हमारा ।।७॥
इक़बाल कोई महरम , अपना नहीं जहाँमें ।
मालूम क्या किसीको , दर्दे – निहाँ हमारा ॥८॥
- अल्लामा इक़बाल
बोस्ताँ = बाग , गुरबत = विदेश , परदेश
हमसाया = पड़ौसी , पासबाँ = रक्षा करने वाला ,
रश्के-जिनाँ = स्वर्ग को भी डाह हो जिनसे ,
महरम = भेद जानने वाला , दर्दे-निहाँ = छिपी हुई वेदना
सुषमा श्रेष्ठ द्वारा गाया ।
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Saturday 21 November 2009
जीवन से लम्बे हैं बन्धु , ये जीवन के रस्ते /मन्ना डे/गुलजार/आशीर्वाद/वसन्त देसाई
जोगी ठाकुर का लिखा गीत तरुणाई से लबरेज गाड़ीवान गा रहा है । जोगी ठाकुर ही इतना डूब के सुन रहे हैं ,उसे पता नहीं है ।
स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद
स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद
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वसन्त देसाई
Wednesday 4 November 2009
दिल नाउम्मीद तो नहीं , नाकाम ही तो है
आज रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर गीत चढ़ाने वाले शौकीनों के लिए ’खुले स्रोत ’ का उपाय सोदाहरण बताया है । दो बार असफल होने के बावजूद उदास नहीं हुआ , फलस्वरूप यह उम्मीद पैदा करने वाला गीत आप सबके लिए प्रस्तुत हो सका । दिल नाकामयाब भले ही हो, नाउम्मीद न हो - आप सब के लिए यह कामना है । रवि भाई को समर्पित
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