Thursday, 2 July, 2009

तीन सदाबहार कव्वालियां

तीन सदाबहार फिल्मी कव्वालियाँ प्रस्तुत हैं । लोग- बाग पसन्द करेंगे तो और पेश करने का साहस करूँगा । इन कव्वालियों का रुहानी अर्थ पहले नहीं दिखता था । यह मत सोचिएगा कि बुढ़ौती का परिणाम है- दिखने लगना । लोकनायक जयप्रकाश बताते थे कि किशोर और तरुणों के लिए भी आध्यात्मिकता की तमाम मिसालें दे कर ।

ये है इश्क - इश्क

न तो कारवाँ की तलाश है

कहीं दाग न लग जाए

Wednesday, 1 July, 2009

रफ़ी और अनेक



विविध भारती से कभी एक कार्यक्रम प्रसारित होता था - ’एक और अनेक’ । आज उसी कार्यक्रम की याद में मोहम्मद रफ़ी के साथ विभिन्न गायिकाओं के दोगाने हैं ।

Sunday, 28 June, 2009

येसूदास के आठ मधुर गीत


येसुदास के हिन्दी फिल्मी गीतों का दौर । बहुत आनन्ददायक दौर । क्या किसी क्षेत्रवादी साजिश के कारण उन्होंने हिन्दी फिल्मों गीतों में गाना बन्द कर दिया था ? अज़दक भाई शायद बता दें । या युनुस बतायें ।

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Friday, 26 June, 2009

दिस् इज् इट् ! अलविदा माइकल जैकसन्

लोकप्रिय गायक माइकल जैकसन नहीं रहे । उनके मुरीदो की तादाद बहुत बडी है । 'आगाज' द्वारा स्मरण ।

Saturday, 25 April, 2009

ये पाँच सालों का देने हिसाब आये हैं

कमलेश्वर और गुजराल की फिल्म आँधी आपातकाल के दौरान आई थी । इसे अलिखित तौर पर रोक दिया गया था । इस गीत में सुचित्रा सेन की चाल से आपको इन्दिरा गाँधी की चाल नहीं याद आती ?

Thursday, 23 April, 2009

चुनाव - गीत

सिर्फ़ गायिकाओं के गाये चुनिन्दा दोगाने और कोरस

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Tuesday, 21 April, 2009

' विरह विथा का को कहूं सजनी '

कल मेरी पत्नी डॉ. स्वाति उत्तर बंग में समाजवादी जनपरिषद के दो प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने गयी हैं । आज उनकी प्रिय एम. एस. सुब्बलक्ष्मी के स्वर में मीराबाई के यह तीन भजन पेश कर रहा हूँ । वे लौटकर सुनेंगी । मैं आज सुन रहा हूँ। क्या पता गुनगुना रही हों , चुनावी सभाओं के बीच के अन्तराल में !
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Saturday, 11 April, 2009

मतवारी कोयलिया डार-डार / उस्ताद राशिद खान/राग बहार

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Monday, 6 April, 2009

राग देश में तराना : उस्ताद राशिद खान

परसों तक विदुषी वीणा सहस्रबुद्धे विविध भारती के ’संगीत सरिता’ में ’तरानों’ से परिचय करा रही थीं । ज्यादातर हमारी काशी के पद्मश्री पंडित बलवन्तराय भट्ट जी द्वारा तैय्यार तराने सुनाये,उन्होंने ।
उसी प्रक्रिया में मुझे उस्ताद राशिद खान साहब का ,राग देश में यह तराना मिल गया । उम्मीद है आप को भी पसन्द आयेगा ।

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Tuesday, 31 March, 2009

उस्ताद राशिद खान / राग बहार / मतवारी कोयलिया डाल-डाल

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Tuesday, 24 March, 2009

ओ रसिया मोरे पिया , छीन ले गयो रे जिया

१९६९ में बनी प्रार्थना फिल्म का यह गीत आशा भोंसले ने गाया है और हृदयनाथ मंगेशकर का संगीत है । इस धुन पर पहले एक मराठी गाना बना था - 'येरे घना,येरे घना' जो हिन्दी गीत से ज्यादा लोकप्रिय हुआ था।

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Sunday, 22 March, 2009

काजोल की माँ का मजेदार गीत

तनुजा ( काजोल की माँ ) पर गाया एक मजेदार गीत । शैलेन्द्र का लिखा , सलिल चौधरी द्वारा संगीतबद्ध ।

Saturday, 21 March, 2009

सच हुए सपने तेरे / काला बाजार / आशा भोंसले

सच हुए सपने तेरे झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा

बेकल मन का धीरज लेकर मेरे साजन आये
जैसे कोई सुबह का भूला साँझ को घर आ जाए
प्रीत ने रंग बिखेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा

मन की पायल छम छम बोले,हर एक साँस तराना
धीरे धीरे सीख लिया अंखियोंने मुसकाना
हो गए दूर अँधेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा

जिस उलझन ने दिल उलझाके सारी रात जगाया
बानी है वो आज प्रीत की माला मन का मीत मिलाया
जगमग साँझ सवेरे , झूम ले ओ मन मेरे
[चिकी चिकी चिक चई ]-२
चिकी चिकी चिक चा

Thursday, 19 March, 2009

मन आनन्द आनन्द छायो - विजेता , राग अहिर भैरव

अजित वर्मन द्वारा संगीत से सँवारा गया , वसन्त देव द्वारा रचित , फिल्म - विजेता (१९८२) का यह गीत आशा भोंसले और सत्यशील देशपाण्डे का गाया हुआ है । गीत अहिर भैरव पर आधारित है ।
मन आनन्द आनन्द छायो
मिट्यो गगन घन अन्धकार
अँखियों में जब सूरज आयो

उठी किरन की लहर सुनहरी
जैसे पावन गंगाजल
अर्पण के पल हरसिंगार मधु गीत निन्दूरी गायो
मन आनन्द...

ऐसी पीड़ रही मन में तो
असुँवन हाथ बिकानी
आँसुओं से भये बिना सुरी
रोम रोम मुस्कायो
मन आनन्द...

मान सरोवर मगन कम्पन
नभ-दर्पण की झाँकी
तामे अविकल ,अधखुल लोचन
प्राण-हंस उतर आयो
मन आनन्द...


Thursday, 12 March, 2009

जर्मन रेडियो डॉएचे वेले पर गांधी - चर्चा


उज्ज्वल भट्टाचार्य मेरे शहर बनारस की वामपंथी युवा राजनीति से जुड़े रहे । १९७९ से जर्मनी में जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के हिन्दी प्रभाग से जुड़े हैं । रेडियो पत्रकारिता के अलावा उज्ज्वल कविता और कहानी लिखते हैं । उन्होंने गेथे , हाइन , ब्रेख़्त , एनज़ेन्सबर्गर , ग्रास तथा हाइनर की रचनाओं के हिन्दी अनुवाद किए हैं तथा फ़ैज़ और रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कुछ रचनाओं के जर्मन में अनुवाद भी किए हैं । उज्ज्वल की जर्मन से अनुदित कवितायें - वतन की तलाश ( एरिक फ्रायड की कवितायें ) , भविष्य संगीत ( हान्स-मैग्नस एन्ज़ेन्सबर्गर की कविताएं) , एकोत्तरशती (ब्रेख़्त की १०१ कवितायें ), पता है तुम्हे उस देश का ( गेथे की कवितायें) प्रकाशित हो चुकी हैं ।

रेडियो जर्मनी डॉएचे वेले की साप्ताहिक सांस्कृतिक हिन्दी रेडियो पत्रिका ‘रंग तरंग’ में उज्जवल ने गत सोमवार को गांधीजी के सामानों की शराब तथा एयरलाइन्स व्यवसायी माल्या द्वारा बोली लगा कर खरीदने की चर्चा की । चर्चा का एक हिस्सा मुझसे बातचीत है । उक्त चर्चा की प्रस्तुति उनके जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के प्रति आभार प्रकट कर यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ । मैं प्रसारण के वक्त इसे नहीं सुन पाया था । लंका स्थित ‘गार्जियन’ रामजी टंडन ने प्रसारण सुना था और प्रसन्न हो कर मुझे खबर दी थी। टंडनजी पर कभी अलग से चर्चा की जाएगी ।
सुनिए जर्मन रेडियो डॉएचे वेले के कार्यक्रम ‘रंग तरंग’ का यह अंक और अपनी राय भी प्रकट कीजिए -

Tuesday, 10 March, 2009

शास्त्रीय संगीत पर आधारित कुछ फिल्मी गीत

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होली पर विशेष प्रस्तुति ४

Monday, 9 March, 2009

होली पर विशेष प्रस्तुति ३ : सदाबहार नगमे

होली पर विशेष प्रस्तुति ३

सदाबहार नगमे



पिछले भाग : एक , दो

Sunday, 8 March, 2009

चार होली गीत : अनीता सेन,छन्नुलाल मिश्र,बेगम अख्तर

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होली पर विशेष प्रस्तुति २

Saturday, 7 March, 2009

मुझे चुभती है ,ये तो निगोड़ी भारी अंगिया

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होली पर विशेष प्रस्तुति - (१)

मन , राम रंगी रंग ले : पं भीमसेन जोशी

Saturday, 28 February, 2009

पाँच मधुर गीत

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Wednesday, 18 February, 2009

'धनी - धनी धन्य हो बढ़इय्या'

अतहि सुन्दर पालना गढ़ि लाओ रे बढ़इया, गढ़ि लाओ रे बढ़इया

शीत चन्दन कटाऊँ धरी,खलादि रंग लगाऊँ विविध ,

चौकी बनाओ रंग रेशम ,लगाओ हीरा, मोती ,लाल बढ़इया ।

आनी धर्यो नन्दलाल सुन्दर,व्रज-वधु देखे बार-बार

शोभा नहि गाए जाए ,धनी ,धनी ,धन्य है बढ़इया ।।



करीब ४० साल पहले विदूषी गिरिजा देवी की योज्ञ शिष्या डॉ. मन्जू सुन्दरम ने स्कूल में यह सुन्दर गीत सिखाया था । उनके मधुर स्वर में यह गीत प्रस्तुत कर पाता तो क्या बात होती ! मंजू गुरुजी ने कहा तो है कि उनके स्वर में सी.डी. बनेगी। फिलहाल ब्लॉग के पते के अनुरूप सुराबेसुरा झेल लीजिए !
गीत में सिर्फ पालने की स्तुति नहीं है अपितु पालने को गढ़ने वाले बढ़ई की स्तुति भी है । मैंने १९७७ में करीब चार महीने की एक नौकरी की थी - ' अदिति : शिल्प और बाल जीवन' नामक राजीव सेठी कृ्त शिल्प प्रदर्शनी में । प्रदर्शनी की थीम के अनुरूप यह गीत था सो उसका उपयोग किया गया । बनारस में शिल्प एकत्र करने के अलावा प्रदर्शनी के लिए गीत जुटाने और उनके अनुवाद में मैंने मदद की थी । अपनी बिटिया को लोरी के रूप में यह गीत सुनाता था।


डाउनलोड हेतु

Tuesday, 10 February, 2009

पंडित भीमसेन जोशी व उस्ताद राशिद खान:राग शंकरा:परिचय उस्ताद विलायत खान

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन के दो शिखर पंडित भीमसेन जोशी और उस्ताद राशिद खान राग शंकरा प्रस्तुत कर रहे हैं । सितार की मूर्धन्य वादक उस्ताद विलायत ख़ान इस राग का परिचय करा रहे हैं । विलायत ख़ान साहब का ७८ आर.पी.एम का पहला रेकॉर्ड मात्र आठ साल की उम्र में जारी हुआ था तथा मृत्यु से पहले ७५ वर्ष की अवस्था में अन्तिम प्रस्तुति की ।


Tuesday, 3 February, 2009

' हमनी के रहब जानी , दूनो परानी ' : शारदा सिन्हा

शारदा सिन्हा जब आईं और बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में छा गयीं तब उनका यह गीत हमारे दिमाग पर सवार हो गया था , लाजमी तौर पर ।

Saturday, 31 January, 2009

माता सरस्वती ,शारदा,विद्यादानी ,दयानी,दु:खहरणी

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Tuesday, 13 January, 2009

मन्दी में मन्द होता ऑनलाइन संगीत और महेन का सवाल

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हिन्दी ब्लॉग जगत में संगीत पेश करने वाले इन दिनों कुछ झुँझलाहट से गुजर रहे हैं । चिट्ठे पर संगीत चढ़ाने की मुफ़्त सुविधा देने वाली कम्पनियों ने अपना हाथ खींचना शुरु कर दिया है । कुछ पूरी तरह बन्द हैं तथा कुछ ने 'मुफ़्त' श्रेणी से यह सुविधा हटा ली है । एक साथ कई कम्पनियों की सेवाओं में कटौती झेलते हुए यह लगता है कि वैश्विक आर्थिक मन्दी से वे मन्द हो गयी हैं ।

    लाइफ़्लॉगर  महीनों से 'हिचकियाँ' ले रहा है । जिन लोगों ने इसकी मुफ़्त सदस्यता ले कर गीत / विडियो चढ़ाये थे उन तक पहुँच पाना भी नामुमकिन हो गया है।

    स्प्लैशकास्ट्मीडिया ने आपके निजी कम्प्यूटर से ऑडियो / विडियो टुकड़ों को ऑनलाइन चढ़ाने की सुविधा मुफ़्त श्रेणी से हटा ली है । गनीमत है कि इस दौर के पहले चढ़ाए गीतों से आप मरहूम नहीं हुए हैं ।

   गनीमत है ऑनलाइन विडियो डाउनलोड करने की सुविधा रियल प्लेयर ने अभी नहीं छीनी ।  इसके मुफ़्त संस्करण से भी आप यूट्यूब के विडियो अत्यन्त सरल तरीके से डाउनलोड कर पाते हैं । इसका एक बड़ा गुण है कि कि एक बार डाउनलोड करने के बाद आप बिना व्यवधान सुन/देख पाते हैं । रियल प्लेयर से स्प्लैशकास्टमीडिया पर गीत चढ़ाने पर बिना रुकावट गीत सुने जा सकते थे ।

   डिवशेयर ने अब तक कटौतियाँ शुरु नहीं की हैं । संगीत प्रेमी चिट्ठेकार डर रहे हैं कि  ऐसा न हो । अन्य विकल्प भी आजमाने का समय आ गया है ।

   मन्दी के इस दौर में मन्डी के गीत सुनकर महेन ने एक बुनियादी सवाल उठा दिया है - " कहाँ से जुटा लाते हैं ऐसे अप्राप्य गीत? "

    इस सवाल का बुनियादी जवाब है , " मैत्री द्वारा ।" मैंने आज तक गीत-संगीत-सिनेमा का सीडी / डीवीडी नहीं खरीदा। सभी गीत ऑनलाइन हासिल किए हैं । ईस्नाइप और यूट्यूब  जैसी साइट पर संगीत प्रेमियों से 'दोस्ती' हो जाने पर यह अत्यन्त सहज हो जाता है। 'मित्र' जब ईस्नाइप पर गीत चढ़ाते हैं तो सूचित करते हैं और शुरु में उसे डाउनलोड करने लायक रखते हैं । मेरी तरह कॉपीराइट पेटेण्ट में यकीन न रखने वालों की तादाद कम नहीं है तथा इनकी आपसी मैत्री का मुख्य आधार संगीत का आदान प्रदान होता है । ईस्नाइप पर सर्वाधिक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत चढ़ाने वाले बन्दे ने ईस्नाईप से डाउनलोड की विधि भी अपने पेज पर दी हुई है ।

    हिन्दी ब्लॉगजगत में संगीत प्रेमी इस कठिन दौर में कर्णप्रिय संगीत पेश करते रहेंगे , उम्मीद है ।

   अब देखिए , आज किशोर कुमार ( अभिनय ) के लिए मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गीत सीधे पेश नहीं कर पा रहा हूं। आपको डिवशेयर से फाइल डाउनलोड करनी होगी । लेकिन गीत कर्णप्रिय है ।

    

Sunday, 4 January, 2009

मण्डी के कुछ गीत

वनराज भाटिया द्वारा संगीतबद्ध दस गीत यहाँ पेश किए थे । रसिकों ने सराहा था । आज श्याम बेनेगल की मण्डी के चार गीत मिल गये ।
जाड़ा-पाला में सुनिए । गनवा लगा के घोंसले में घु्स जाइए फिर बताइए ।

हर में हर को देखा



इश्क के शोले को भड़काओ



शमशीर बरैना



ज़बाने बदलते हैं

Friday, 2 January, 2009

'तुम हो गरीब नेवाज'-तुलसीदास : भीमसेन जोशी

'रघुवर तुम तो मेरी लाज ,सदा-सदा मैं सरन तिहारी,तुम हो गरीब नेवाज'। संगीतकार जयदेव ने पंडित भीमसेन जोशी का गाया तुलसीदास का यह भजन १९८५ में बनी फिल्म 'अनकही' में लिया है । 'माँग के खईबो , मसीद में सोईबो' वाले तुलसीदास यहाँ भी छद्म धर्म निरपेक्षता के चक्कर में पड़ गए ? 'रघुवर' को 'गरीब नेवाज' की जगह 'दीनबन्धु' टाइप कुछ न कह सके ?

Friday, 12 December, 2008

महुआ घटवारिन जैसे अनिल रघुराज को

हिन्दी चिट्ठालोक के दृढ लेखक अनिल रघुराज एक लम्बे अन्तराल के बाद लौटे हैं । खुद की तुलना महुआ घटवारिन से उन्होंने की ,यह दिल को छू गया । अपनी मीता (वहीदा रहमान ) को महुआ घटवारिन की कहानी सुनाता हीरामन ( राज कपूर )अनिल को बार बार याद आ रहा है ।
अनिल द्वारा फिर से चिट्ठाकारी की शुरुआत को समर्पित उनका प्रिय यह गीत यहाँ प्रस्तुत हैं :

Tuesday, 18 November, 2008

देखा - देखी बलम हुई जाए : बेगम अख़्तर

हमरी अटरिया पे आओ सँवरिया,देखा-देखी बलम हुई जाए।
प्रेम की भिक्षा मांगे भिखारन,लाज हमारी रखियो साजन।
आओ सजन तुम हमरे द्वारे,सारा झगड़ा खतम हुई जाए ॥


बेग़म अख़्तर का गाया यह दादरा आज पहली बार सुना । आशा है , आप लोगों को भी पसन्द आएगा ।

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Saturday, 8 November, 2008

राहुल देव बर्मन की स्मृति में चुनिन्दा गीत

संगीतकार राहुल देव बर्मन की स्मृति में मेरे द्वारा चयनित उनके कुछ गीत इस विडियोलॉग में पेश हैं । इनमें ऐसे गीत भी शामिल हैं जिनकी धुन उन्होंने बचपन में बनायी और उनके पिता सचिनदेव बर्मन ने उन्हें अपनी फिल्मों में शामिल कर लिया। उम्मीद है आप सब को भी पसन्द आयेंगे ।

Wednesday, 5 November, 2008

प्यास लगे तो एक बराबर...

देश की सभी नदियाँ राष्ट्रीय हैं । लेकिन गंगा तो 'प्यास लगे तो एक बराबर सब में पानी डाले' , 'नि:शब्द सदा बहने वाली'(स्व. पंडित नरेद्र शर्मा के बोल)है । उर्दू के बेनज़ीर शायर नज़ीर बनारसी गंगा जल में वजू कर नमाज अदा करने की बात कहते थे। नज़ीर बनारसी की गंगा पर वह रचना अति शीघ्र प्रस्तुत करूंगा।


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