Friday 22 August 2008

'शाम' पर चार मधुर फिल्मी गीत

डी. वी. पलुस्कर को सुनने वाले जो हिन्दी चिट्ठों पर पहुंचते हैं , अभी कम हैं । ऐसे में फिल्मी गीत सुनें :



हुई शाम उनका खयाल आ गया - मेरे हमदम मेरे दोस्त 


रोज शाम आती थी - इम्तेहान
दिन ढल जाए - गाइड
वो शाम कुछ अजीब थी - ख़ामोशी



6 comments:

  1. बहुत प्यारे गीत हैं भई, बस मजा आ गया।

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  2. अफलातून जी,
    आपके चिट्ठे पर डी वी पलुस्कर के संगीत की सभी प्रविष्टियाँ बुकमार्क कर रखी हैं, आगे और भी इंतज़ार रहेगा |

    इम्तिहान फ़िल्म का ये गीत पहली बार सुना, बहुत आभार |

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  3. बहुत सुन्दर। सुनकर आनन्द आगया। आभार।

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  4. a wonderful collection of songs and so apt too! what do i say?
    shekhar s

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  5. बहुत सुन्दर!! आभार सुनवाने का.

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  6. may i add

    http://www.youtube.com/watch?v=YrfjG88MFMA

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पसन्द - नापसन्द का इज़हार करें , बल मिलेगा ।