Sunday 26 October 2008

दीवाली पर सप्रेम उपहार , दुर्लभ गीतों का

दिनेशरायजी की तरह दीवाली के अवसर पर मेरी बिटिया प्योली भी घर आई है । उसने दो तीन गीतों की फरमाईश कर दी जो मेरे जमाने के हैं और उसने बचपन में सुने हैं । बहुत मुश्किल हो गयी खोजने में । लेकिन मेहनत का फल मिला किसी न किसी रूप में । उम्मीद है आप सब इनका पूरा रस लेंगे ।

जिन्दगी को संवारना होगा



आई ऋतु सावन की





चाँद अकेला जाए सखी री



नई री लगन और मीठी बतियां

9 comments:

  1. आप सभी को दीपावली की शुभकामनाएँ …प्योली को ख़ासतौर पर धन्यवाद इतनी सुंदर पोस्ट के लिये

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  2. सचमुच इन गीतों ने पुराने दिनों की याद दिला दी। आज कल 60-80 के दशकों के गीत लौट रहे हैं। बेटा जब से आया है। उस जमाने के गीतों के वीडियो डाउनलोड करने में लगा है।

    दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ।
    लोग मंदी से कुछ सीखें।

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  3. बहुत सुंदर गीत . दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामना .

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  4. मन प्रसन्न हो कर दिया आप ने.

    आप को और आप के परिवार को दीवाली की शुभकामनाएं.

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  5. बहुत सुंदर | दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
    दीवाली आप के लिए समृद्धि लाए।

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  6. आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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  7. प्योली की पसन्द तो बड़ी खास लग रही है..अच्छा लगा....और क्या क्या है...सुनाईयेगा हम तैयार बैठे हैं, हमारी तरफ़ से दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  8. दिपावली की शूभकामनाऎं!!


    शूभ दिपावली!!



    - कुन्नू सिंह

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  9. बहुत सुन्दर गीत सुनवाने के लिए प्योली जी व आपका धन्यवाद ।
    आपको व आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं ।
    घुघूती बासूती

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पसन्द - नापसन्द का इज़हार करें , बल मिलेगा ।