Saturday, 19 December, 2009

पूर्व बांग्ला की लोक धुन भटियाली , सितार, फिल्म संगीत पर

भटियाली वे बांग्ला नौकागीत हैं जो भाटा के दौरान नाविक गाया करते हैं , नदी की बहने की स्वाभाविक दिशा में । भटियाली - धुन इतनी मधुर और लोकप्रिय है की गीतों के अलावा प्रख्यात वादकों ने इन्हें सितार ,सरोद और बाँसुरी पर बजाया है । भटियाली में रवीन्द्र संगीत भी है । अन्य भारतीय भाषाओं में भी भटियाली धुनें अपनाई गई हैं । यहाँ भटियाली की दो धुनों पर दो हिन्दी फिल्मी गीत,सितार पर उस्ताद विलायत खान की बजाई एक धुन तथा रुना लैला का गाया एक बांग्ला लोक गीत है । गौर कीजिएगा धुनें दो हैं,दोनों भटियाली ।
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली

नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला



गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का 'ऐ मेरे प्यारे वतन' लिखा है)

7 comments:

  1. बहुत कुछ नया जान जाता हूँ यहाँ आकर । खूबसूरत प्रस्तुति । आभार ।

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  2. अच्छे लगे गीत ..सुन्दर.

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  3. पहले वाद्य फिर कंठ गीतों ने मन मोह लिया ..
    लोकधुनों में क्या असर है !
    ............ आभार ,,,

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  4. आपको कभी पकड़ना ही पड़ेगा। संगीत में जानने समझने के लिये बहुत कुछ है।

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    1. इस बार (२८ से ३० अगस्त) बंगलुरु में लेकिन आपको नहीं पकड़ पाए। सप्रेम,

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