Sunday 20 July 2008

कैसे उनको पाऊँ ,आली/ महादेवी वर्मा /आशा भोंसले/जयदेव

पिछली बार कबीर की बेटी कमाली का लिखा 'श्याम निकस गये, मैं न लड़ी थी' गीत प्रस्तुत किया था जिसे मेरे प्रिय रसिकों ने पसन्द किया। एचएमवी ने आशा भोंसले के गैर फिल्मी गीतों और गज़लों का एक एलपी जारी किया गया था,उक्त गीत उसमें था। उस तवे पर जयशंकर प्रसाद , महादेवी और निराला के गीत भी थे । सभी गीतों की धुन प्रख्यात संगीतकार जयदेव की बनायी है ।
यहाँ प्रस्तुत है उस संग्रह से महादेवी वर्मा का गीत - कैसे उनकों पाऊँ , आली

7 comments:

  1. वाह बेहद सुंदर गीत, नायाब संकलन लगता है, कुछ और भी गीत सुन्वावियेगा

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  2. बहुत नायाब नगीना लायें है अफलातून साहब.
    इस संग्रह से शेष मोती भी प्रस्तुत करने का आग्रह है.

    अनूप जलोटा की शुरूआती पंक्ति पहली दूसरी बार सुनने में चल जातीं है लेकिन बार बार में वाकई परेशान करतीं है.

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  3. adhbhut geet hai..agar asha ka gaya..TUMUL KOLAHAL ho aapke pass to sunvayiyee..aabhaar

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  4. बेहतरीन पेशकश -
    काश ये प्रसिध्ध गायक
    हिन्दी साहित्य के
    और भी गीतोँ को गायेँ -

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  5. Shukriya is nayaab prastuti ke liye. Maine is album ke tumul kolahal... kayi baar radio or blog par suni hain. Wo bhi sunne mein man khush ho jata hai.

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  6. इतना सुन्दर व मधुर गीत सुनवाने के लिए धन्यवाद।
    घुघूती बासूती

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  7. देर से नज़र पड़ी. आशा-जयदेव के इस एल्बम का नाम था "एन अनफ़ारगेटेबल ट्रीट". वाकई नाम को सार्थक करता एल्बम था. इस एल्बम के कुछ गीतों के बोल मैंने अपने मृतप्राय ब्लॉग सुगम संगीत पर पोस्ट किए थे.

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