डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है ।
इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बदाऊँ के हैं ।’ इस नयी दोस्ती के नाम पर आज की पोस्ट उस्ताद राशिद ख़ान द्वारा राग भटियार में गाया तराना है। कहते हैं , भटियार शब्द का मूल भतृहरि से है। इसके गायन का वक्त पौ फटते ही है ।
उस्ताद राशिद ख़ान के गायन का रस लीजिए :
राजनीति के क्षत्रप
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[image: szkitalovas.plaque]
भा रतीय राजनीति में भी क्षेत्र शब्द की व्याप्ति जबर्दस्त है। *क्षेत्रवाद*जैसे शब्द का प्रयोग अक्सर राजनीतिक संदर्भों में ही ज्या...
12 hours ago



8 comments:
Dhanyavad Aflatoon!
क्या बात है!!!
A strange fusion of words, historic place, pictures and music! Wow!
Badaun comes alive for me. Great!
बहुत खूब!
very nice
सुन्दर..
हमारे जैसे लोग सुबह तो नहीं सुन पाते हैं पर साम के इस पहर में भी इसे सुनना सुकून दे गया।
एक तो राशिद खान साहब की गहरी आवाज़ उस पर सोहे भटियार ...जैसे माँ बच्चे को भोर में जगाती है नीद से ...पुचकार के.... अद्भुत ..आभार
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