Sunday 27 December 2009

भारतीय रॉक सितारा अशीम चक्रवर्ती नहीं रहे

पता नहीं मैं रॉक संगीत समझता था या नहीं । कितना सुना था इसका भी अन्दाज न था । भारत में इण्डियन ओशन जैसे बैण्ड तथा पाकिस्तान के कुछ बैण्ड्स के आने के बाद मेरे जैसों के लिए इस विधा के दरवाजे खुले । बहुत कुछ कर्णप्रिय लगा , समझ में भी आया और स्पन्दित कर गया । इस विप्लवी-से संगीत से मेरी घनिष्टता और परिचय अगली पीढ़ी के कारण हुआ ।
भारतीय रॉक प्रेमियों के लिए २५ दिसम्बर , २००९ का दिन दु:खद रहा । ’इण्डियन ओशन’ नामक बैण्ड के प्रमुख और पुराने सदस्य अशीम चक्रवर्ती की ५२ साल की अवस्था में हृदय आघात से मृत्यु हो गयी । अशीम इस फ़्यूजन रॉक बैण्ड के संस्थापक सदस्यों में थे । उनकी नीचे के सप्तक और ऊपर के सप्तक के बीच का विस्तार असीम था । उन्होंने विज्ञापन का काम छोड़कर यह बैण्ड बनाया ।

मैं जिन गीतों से प्रभावित हुआ हूँ , उन्हें यहाँ पेश कर रहा हूँ । दोनों गीतों के बोलों को सुन कर काफ़ी सूफ़ी / निर्गुण सा लगता है । अपनी राय दीजिएगा । अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में उनका गीत लिया था (बन्दे-यह गीत पेश है) । दूसरा गीत गुलाल से है,अशीम के साथ राहुल राम का स्वर है ।

Saturday 19 December 2009

पूर्व बांग्ला की लोक धुन भटियाली , सितार, फिल्म संगीत पर

भटियाली वे बांग्ला नौकागीत हैं जो भाटा के दौरान नाविक गाया करते हैं , नदी की बहने की स्वाभाविक दिशा में । भटियाली - धुन इतनी मधुर और लोकप्रिय है की गीतों के अलावा प्रख्यात वादकों ने इन्हें सितार ,सरोद और बाँसुरी पर बजाया है । भटियाली में रवीन्द्र संगीत भी है । अन्य भारतीय भाषाओं में भी भटियाली धुनें अपनाई गई हैं । यहाँ भटियाली की दो धुनों पर दो हिन्दी फिल्मी गीत,सितार पर उस्ताद विलायत खान की बजाई एक धुन तथा रुना लैला का गाया एक बांग्ला लोक गीत है । गौर कीजिएगा धुनें दो हैं,दोनों भटियाली ।
हिन्दी फिल्मों में भी भटियाली-धुनों पर गीत आये जो सदाबहार बन गये ।
उस्ताद विलायत खान : सितार : भटियाली

नन्हा-सा पंछी रे तू बहुत बड़ा पिंजडा तेरा आमाय डुबाइली रे , आमाय भाशाईली रे - रुना लैला



गंगा आये कहाँ से : काबुलीवाला : हेमन्त कुमार : सलिल चौधरी : गुलजार ( प्रेम धवन ने इसी फिल्म का 'ऐ मेरे प्यारे वतन' लिखा है)