Wednesday 29 July 2009

लालित्यपूर्ण लीला नायडू की स्मृति में अनुराधा


लालित्यपूर्ण फिल्म नायिका लीला नायडू का कल लम्बी बीमारी के बाद देहान्त हो गया । वे ६९ वर्ष की थी । उनके पिता रामैय्या नायडू परमाणु भौतिकविद थे , माँ आयरलैण्ड/फ्रांसीसी मूल की थीं । वे १९५४ की फेमिना मिस इंडिया थीं । महारानी गायत्री देवी के साथ लीला नायडू को भी वोग पत्रिका ने दुनिया की दस सुन्दर महिलाओं की अपनी सूची में रखा था ।
उन्होंने १९६० में बनी हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म अनुराधा से अभिनय की शुरुआत की । इस फिल्म का संगीत मशहूर सितारवादक पण्डित रवि शंकर का था । इस फिल्म में उनके नायक बलराज साहनी थे । अनुराधा चली नहीं लेकिन लीला नायडू के अभिनय की अच्छी चर्चा हुई और फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। लीला नायडू की स्मृति में लता मंगेशकर के गाये अनुराधा के चार अमर गीत आज प्रस्तुत किए जाए रहे हैं ।

१. हाय रे वो दिन क्यूँ न आए

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२. कैसे दिन बीते , कैसे बीतीं रतियाँ

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३. साँवरे - साँवरे



४. जाने कैसे सपनों में खो गईं

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Friday 24 July 2009

मस्ती में झूले और सभी गम भूलें : सचिन बर्मन/लता/साहिर/हाऊस नं ४४

कहते हैं कि लता मंगेशकर द्वारा इस गाने की अदायगी से गदगद होकर सचिन देव बर्मन ने अपना एक बीड़ा पान उन्हें पेश कर दिया था । पान के अपने भंडार में से एक पान घटाना वे तब ही करते जब दिल से मामला जमा हो ।
१९५५ में बनी हाउस नम्बर ४४ । साहिर लुधायनवी की सुन्दर - सहज शब्द रचना । कल्पना कार्तिक पर फिल्माया गया ।
फैली हुई हैं सपनों की बाहें , आ जा चल दें कहीं दूर
वहीं मेरी मंजिल , वहीं तेरी राहें , आ जा चल दें कहीं दूर ।
ऊँची घटा के साये तले छिप जाँए,
धुँधली फ़िज़ा में ,कुछ खोयें ,कुछ पायें ।
साँसों की लय पर , कोई ऐसी धुन गायें,
दे दे जो दिल को दिल की पनाहें ॥ आ जा चल दें...

झूला ढलकता ,घिर घिर हम झूमें,
अम्बर तो क्या है , तारों के भी लब चूमें ।
मस्ती में झूलें और सभी गम भूलें ,
पीछे न देखें मुड़ के निगाहें ॥ आ जा चल दें
साहिर लुधियानवी

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Monday 20 July 2009

उस्ताद अमीर खान / पूरिया धनश्री / बैजू बावरा / तोरी जय जय करतार

बैजू बावरा फिल्म में पक्का गायन तानसेन के लिए उस्ताद अमीर खान और बैजू बावरा के लिए पण्डित डी. वी. पलुस्कर ने किया था । विविध भारती पर उस्ताद अमीर खान के गाई इस बन्दिश को नहीं सुना । संगीत निर्देशक नौशाद हैं । यहाँ रस लीजिए :
तोरी जय जय करतार (२)
मोरी भर दे आज झोलिया
तू रहीम दाता तू पाक किरतिकार
तोरी जय जय करतार

तानसेन को तू रब , ज्ञान ध्यान दीजो सब
तानसेन को तू रब ( आलाप )

राग रंग सागर है कर दे नैय्या पार

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Saturday 18 July 2009

आज सिर्फ़ मन्दीजन्य मरम्मत

कल ही प्रिय मित्र प्रियंकर ने बताया कि उनका प्रिय एक गीत लाइफ़लॉगर खा गया ! गत मकर संक्रांति के दिन इस ब्लॉग पर एक पोस्ट इस विषय पर लिखी थी । तब इस बात का अन्दाज ही नहीं था कि लाईफ़लॉगर जैसी सेवा न केवल नये गीतों को चढ़ाने के लिए मृत है अपितु गैर-मंदी दौर में इस पर चढ़ाये गीत भी साईबर व्योम में डूब गये हैं । फलस्वरूप अच्छी भली पोस्ट गीत/कविता विहीन हो गयी हैं । उन पर भूले भटके जो भी पहुँचता होगा वह अब सिर्फ़ पाठक होगा श्रोता नहीं ! यह उसके साथ घोर अन्याय है।
अत: उन पोस्टों में पड़ी लाईफ़लॉगर की लाइफविहीन एम्बेडिंग कोड को हटा कर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है । इस मरम्मत को तरजीह दें,गुजारिश है ।

दरियाव की लहर : कबीर का गीत


हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का एक हिन्दी गीत

शाम सहमी न हो , रात हो न डरी , भोर की आंख फिर डबडबायी न हो


बाकी मरम्मत फिर कभी ।

Friday 17 July 2009

मन मोर हुआ मतवाला / सचिनदेव बर्मन / नरेन्द्र शर्मा / सुरैय्या /

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम बारिश होने के बावजूद दो बार मोर को मतवाले होते देख पाया । पहली बार तो एक बच्चा (मानव)पहले दिखा । कितना अचंभित,अभिभूत ! पहली बार मोर को नाचते हुए देखा होगा।
अफ़सर फिल्म (१९५०) के इस सुरीले गीत में नरेन्द्र शर्मा, सचिनदेव बर्मन और सुरैय्या सबका अपूर्व योगदान है :



सैंकड़ों पुराने गीतों के दो डीवीडी सागर नाहर ने मुझे भेट दिए । उनमें से एक में है , यह ।

Thursday 16 July 2009

तोसे नैना लागे रे, पिया साँवरे



कल ही एक मित्र के ईस्नाइप के फोल्डर में सुना । मित्र समीरलाल को समर्पित ।

मोरा सैंया मो से बोले ना !

यह गीत जरूर सुनें । इस गीत के बारे में कोई सूचना दे सकें तो और खुशी होगी ।

Monday 13 July 2009

बादल देख डरी / मीरा / वाणी जयराम / पण्डित रविशंकर

बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरी
श्याम मैं बादल देख डरी
काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यो एक घरी
जित जाऊं तित पाणी पाणी हुई सब भोम हरी
जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी
मीरा के प्रभु गिरधर नागर कीजो प्रीत खरी
श्याम मैं बादल देख डरी

मीराबाई के इस पद को ज्युथिका राय से लगायत कई गायिकाओं और गायकों ने भी गाया है । मशहूर ब्लॉगर ने ज्युथिका राय का गाया ’ गीतों की महफ़िल ’ में पहले पेश किया था। गुलजार की बनाई ’ मीरा’ फिल्म में पण्डित रविशंकर का संगीत है और इस पद को वाणी जयराम ने गाया है । वाणी जयराम का गाया मेरी पत्नी डॉ. स्वाति गुनगुनाती हैं और ’जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी ’ की तर्ज पर हमें भीजता छोड़ लम्बे अध्ययन अवकाश पर जा रही हैं ।

Saturday 11 July 2009

जा रे बदरा बैरी जा / फिल्म - बहाना /लता/ मदन मोहन

पिछले साल इस ब्लॉग पर ऋतु अनुकूल गीतों की एक पोस्ट प्रस्तुत की थी । इस साल मानसून विलम्बित है फिर भी छिटपुट बदरा छाते ही कुछ मधुर धुनें बहकाने लगती हैं । आज १९६० में बनी फिल्म बहाना में लता मंगेशकर की आवाज में मदन मोहन द्वारा संगीत में ढाला गया यह गीत पेश कर रहा हूँ । कहते हैं , यह राग यमन कल्याण पर आधारित है ।

Thursday 2 July 2009

तीन सदाबहार कव्वालियां

तीन सदाबहार फिल्मी कव्वालियाँ प्रस्तुत हैं । लोग- बाग पसन्द करेंगे तो और पेश करने का साहस करूँगा । इन कव्वालियों का रुहानी अर्थ पहले नहीं दिखता था । यह मत सोचिएगा कि बुढ़ौती का परिणाम है- दिखने लगना । लोकनायक जयप्रकाश बताते थे कि किशोर और तरुणों के लिए भी आध्यात्मिकता की तमाम मिसालें दे कर ।

ये है इश्क - इश्क

न तो कारवाँ की तलाश है

कहीं दाग न लग जाए

Wednesday 1 July 2009

रफ़ी और अनेक



विविध भारती से कभी एक कार्यक्रम प्रसारित होता था - ’एक और अनेक’ । आज उसी कार्यक्रम की याद में मोहम्मद रफ़ी के साथ विभिन्न गायिकाओं के दोगाने हैं ।