Tuesday 29 April 2008

कहाँ से आए बदरा : इंदु जैन:येशू दास हेमंती शुक्ला

एक पंक्ति ने सूचित किया कि गीतकार इंदु जैन नहीं रहीं । फिल्म चश्मेबद्दूर में उनका रचित यह गीत येशूदास और हेमंती शुक्ला ने गाया है ।

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कहाँ से आए बदरा
घुलता जाए कजरा

पलकों के सतरंगे दीपक
बन बैठे आँसू की झालर
मोती का अनमोलक हीरा
मिट्टी में जा फिसला ॥
नींद पिया के संग सिधारी
सपनों की सुखी फुलवारी
अमृत होठों तक आते ही
जैसे विष में बदला ॥

उतरे मेघ या फिर छाये
निर्दय झोंके अगन बढ़ाये
बरसे हैं अब तोसे सावन
रोए मन है पगला ॥

Friday 25 April 2008

हरि आवन की आवाज : मीरा बाई :सुब्बलक्ष्मी


यह चित्र विभाजन के बाद जल रही फिरकावाराना आग़ के दौरान दिल्ली में हो रहे प्रार्थना - प्रवचन का है । भजन गाने वाली महिलाओं में सब से बाँए, मीरा भजन गा रही हैं एम . एस . सुब्बलक्ष्मी । गाँधी जी के आग्रह पर सुब्बलक्ष्मी ने मीरा के भजन गाए । भक्ति आन्दोलन के दौरान राजपुताना से चल कर मीरा बाई काशी आईं और सन्त रविदास की शिष्य बनीं । इस युग में सुब्बलक्ष्मी ने मीरा के भजनों को कर्नाटक संगीत की सुन्दर धुनें दीं और अपना मधुर स्वर । पूरब-पश्चिम , उत्तर-दक्षिण का अनूठा मेल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है । प्रस्तुत भजन में 'कोयलिया'-शब्द को अनेक बार दोहराते हुए सुब्बलक्ष्मी को गौर से सुनिएगा ।

Thursday 24 April 2008

हाल - चाल ठीक - ठाक है : 'मेरे अपने'



'आपन जन ' नाम से यह फिल्म पहले बाँग्ला में बनी । युवा - आक्रोश की पृष्टभूमि में बनी इस फिल्म को गुलजार ने हिन्दी में निर्देशित किया 'मेरे अपने' नाम से । बतौर निर्देशक गुलजार की पहली फिल्म । मुख्य भूमिका में मीना कुमारी , विनोद खन्ना(शिक्षित युवा) और शत्रुघ्न सिन्हा(अशिक्षित युवा) थे । सलिल चौधरी के संगीत और गुलजार के बोल को मुकेश , किशोर कुमार और साथियों ने स्वर दिया इस फिल्म के एक गीत ने -




देश की तरुणाई , उसकी बेकारी ,भूख़, उसका आक्रोश और जनरेशन गैप की नुमाइन्दगी यह गीत बख़ूबी करता है । गीत के बोलवाले चित्र में एक पद गायब है ।
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Wednesday 23 April 2008

बेक़रार दिल तू गाये जा

'दूर का राही ' फिल्म भी गजब की रही होगी ! कम से कम इसके गाने तो हैं ही गजब । किशोर कुमार ने सुलक्षणा पण्डित के साथ यह गीत गाया तो एक हलचल सी मच गयी थी । यहाँ प्रस्तुत विडियो की क्वालिटी घटिया है लेकिन धैर्य-पूर्वक एक बार 'बफ़रिंग' होने दें ,फिर सुनने का आनन्द मिलेगा । अशोक कुमार ,तनूजा और किशोर कुमार पात्र हैं ।

Wednesday 16 April 2008

लाली है सवेरेवाली




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फिल्म अभी तो जी लें
संगीत सपन जगमोहन
गायक किशोर कुमार , आशा भोसले
गीत तू लाली है सवेरेवाली , गगन रंग दे ,तू मेरे मन का
जो सूरज तू मैं धरती तेरी
तू साथी है मेरे जीवन का

तेरे - मेरे बीच की मिटेगी कब दूरी
होती है कुछ तो सनम सभी की मजबूरी
तुम हो निगाहों में कब आओगी बाहों में
तुम में जो हिम्मत हो , मुझसे मुहब्बत हो
सबसे मुझे छीन लो ॥

तेरे ही फेरे करूँ,खिंची हुई मैं आऊँ
देखूँ तुझे दूर से गले ना लग पाऊँ
किसने तुम्हें रोका , कर लो वो जो सोचा
हँसी न उड़ाओ और न जलाओ
आँचल की तुम छाँव दो ॥

Sunday 13 April 2008

दो प्रेम गीत : प्रेम परबत ,हमराही से

मोहम्मद रफ़ी और मुबारक़ बेग़म का यह मधुर दोगाना, 'मुझको अपने गले लगा लो,ऐ मेरे हमराही', 'हमराही' फ़िल्म से लिया गया है । मुबारक़ बेग़म ने फिल्मों में कम गीत गायें हैं लेकिन उनकी एक विशिष्ट छाप है । प्रेम परबत फ़िल्म ज्यादा नहीं चली थी लेकिन जयदेव का दिया इसका संगीत लोकप्रिय हुआ था । प्रस्तुत गीत ( ये दिल और उनकी निगाहों के साए ) के अलावा एक अन्य मोहक गीत इस फ़िल्म में था : रात पिया के संग जागी रे सखी

Saturday 12 April 2008

रस के भरे तोरे नैन , आप की याद आती रही रात भर

ग़मन फिल्म के दो अत्यन्त मर्मस्पर्शी गीत प्रस्तुत हैं । हीरादेवी मिश्रा का गाया हुआ 'रस के भरे तोरे नैन' तथा छाया गांगुली का गाया 'आप की याद आती रही रात भर'



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